रेल समाचार

ज़रा-सी लापरवाही, और रुक गई पूरी ट्रेन!

कोलकाता: कल्पना कीजिए कि आप एक लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेन में सफर कर रहे हैं। ट्रेन समय पर चल रही है, सैकड़ों यात्री अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं। तभी अचानक ट्रेन झटके से रुक जाती है। यात्रियों को लगता है कि शायद कोई बड़ा हादसा टल गया होगा या कोई गंभीर आपात स्थिति आ गई होगी। लेकिन अगर पता चले कि ट्रेन इसलिए रुकी क्योंकि किसी यात्री की नींद देर से खुली, किसी का मोबाइल गिर गया या कोई अपने घर के थोड़ा नज़दीक उतरना चाहता था, तो शायद आपको यकीन न हो।
पूर्व रेलवे द्वारा जारी ताज़ा आंकड़े कुछ ऐसी ही चौंकाने वाली तस्वीर पेश करते हैं।

मई 2026 के दौरान पूर्व रेलवे के विभिन्न मंडलों में 86 ट्रेनों को अनधिकृत अलार्म चेन पुलिंग (ACP) के कारण बीच रास्ते रोकना पड़ा। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की जांच में सामने आया कि अधिकांश मामलों में कोई वास्तविक आपात स्थिति नहीं थी, बल्कि व्यक्तिगत सुविधा और लापरवाही इसकी वजह बनी।

👉“स्टेशन दूर था, घर पास था”
सबसे दिलचस्प मामलों में कुछ यात्री ऐसे थे जिन्होंने केवल इसलिए चेन खींच दी क्योंकि ट्रेन उनके गांव या घर के पास से गुजर रही थी। आसनसोल और मालदा मंडल में ऐसे कुल 8 मामले सामने आए। यात्रियों ने निर्धारित स्टेशन तक जाने के बजाय ट्रेन को बीच रास्ते रुकवाना ज्यादा आसान समझा।

👉नींद बनी रेलवे के लिए सिरदर्द
कई यात्रियों की गहरी नींद भी सैकड़ों लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी। कुछ लोग तब जागे जब उनका स्टेशन निकलने वाला था। घबराहट में उन्होंने अपनी गलती सुधारने के लिए सीधे आपातकालीन चेन खींच दी। आसनसोल और हावड़ा मंडल में ऐसे 5 मामले दर्ज किए गए।

👉बैग टांगा और ट्रेन रुक गई
कुछ घटनाएं इतनी अजीब थीं कि सुनकर हंसी भी आ सकती है। आसनसोल मंडल में दो यात्रियों ने अपना भारी सामान सीधे आपातकालीन लीवर पर टांग दिया। नतीजा यह हुआ कि चेन सक्रिय हो गई और ट्रेन रुक गई।
इसी तरह कई यात्रियों ने गलती से ACP हैंडल को छू दिया, जिससे ट्रेन का ब्रेक सिस्टम सक्रिय हो गया। ऐसे 10 मामले दर्ज हुए।

👉रिश्तेदार को विदा करना पड़ा महंगा
रेलवे रिकॉर्ड के अनुसार कुछ लोग अपने परिजनों को विदा करने के लिए डिब्बे में चढ़ गए, लेकिन ट्रेन खुलने से पहले उतर नहीं पाए। फिर उन्होंने उतरने के लिए चेन खींच दी। यानी एक भावुक विदाई ने पूरी ट्रेन की यात्रा बाधित कर दी।

👉गलत ट्रेन में चढ़े, फिर रोक दी पूरी ट्रेन
कई यात्रियों को ट्रेन चलने के बाद एहसास हुआ कि वे गलत ट्रेन में बैठ गए हैं। समाधान खोजने के बजाय उन्होंने आपातकालीन चेन खींच दी। आसनसोल और हावड़ा मंडल में ऐसे 6 मामले सामने आए।

👉मोबाइल गिरा, सामान छूटा… और रुक गई ट्रेन
सबसे विचित्र घटनाओं में सियालदह मंडल का एक मामला था, जहां एक यात्री का मोबाइल हाथ से गिर गया। मोबाइल वापस पाने के लिए उसने चेन खींच दी। हावड़ा में एक यात्री ने प्लेटफॉर्म पर सामान छूट जाने के कारण ट्रेन रोक दी, जबकि मालदा में भी इसी तरह की घटनाएं दर्ज हुईं।
एक यात्री ने तो केवल “जल्दी घर पहुंचने” के लिए चेन पुलिंग कर दी।

86 ट्रेनें प्रभावित, हजारों यात्री परेशान
इन घटनाओं का असर केवल कुछ मिनटों तक सीमित नहीं रहा। मई महीने में कुल 86 ट्रेनों को रोकना पड़ा। कई खंडों में ट्रेनों को औसतन 13 से 17 मिनट तक विलंब का सामना करना पड़ा।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार एक ट्रेन का रुकना केवल उसी ट्रेन को प्रभावित नहीं करता, बल्कि पूरे रूट पर चल रही अन्य ट्रेनों के समय-सारणी पर भी असर डालता है।

RPF का सख्त अभियान
बढ़ती घटनाओं को देखते हुए रेलवे सुरक्षा बल ने विशेष अभियान चलाया। मई 2026 में कुल 72 आपराधिक मामले दर्ज किए गए और 58 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
सबसे अधिक कार्रवाई आसनसोल मंडल में हुई, जहां 37 मामले दर्ज कर 33 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

रेलवे की सख्त चेतावनी
पूर्व रेलवे ने स्पष्ट किया है कि अलार्म चेन पुलिंग केवल वास्तविक आपात स्थितियों के लिए है। रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 141 के तहत इसका दुरुपयोग एक दंडनीय अपराध है। दोषी व्यक्ति को एक वर्ष तक का कारावास, 1,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझि ने यात्रियों से अपील करते हुए कहा कि बिना कारण अलार्म चेन खींचना बंद करें ताकि सभी यात्रियों के लिए समयनिष्ठ और सुगम रेल यात्रा सुनिश्चित की जा सके।

एक चेन, हजारों यात्रियों की परेशानी
रेलवे के आंकड़े यह दिखाते हैं कि कभी-कभी किसी एक व्यक्ति की छोटी-सी सुविधा या लापरवाही हजारों यात्रियों की यात्रा को प्रभावित कर सकती है। नींद, मोबाइल, सामान या घर के पास उतरने की इच्छा भले ही व्यक्तिगत समस्याएं हों, लेकिन उनका समाधान आपातकालीन चेन नहीं हो सकता। क्योंकि एक चेन खींचने से सिर्फ ट्रेन नहीं रुकती, बल्कि पूरे नेटवर्क की रफ्तार थम जाती है।

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