देवघर (शहर परिक्रमा)

राज्य सम्मेलन की तैयारियों को लेकर प्रलेश की ऑनलाइन बैठक संपन्न

देवघर: दिनांक 28.06.2026 को प्रलेस झारखंड की ऑनलाईन बैठक हुई जिसमें झारखंड राज्य सम्मेलन की तैयारियों की प्रगति का आंकलन किया गया और अग्रेत्तर कामों को सुनिश्चित किया गया।

    बैठक में राज्य नेतृत्व के साथियों के अलावा जमशेदपुर, देवघर, रांची, पलामू, घाटशिला और रामगढ़ के साथी भी उपस्थित रहे। पॉवेल कुमार ने आयोजन स्थल और आवासन के विषय में अब तक की प्रगति का विवरण साझा किया। इस संबंध में व्यवस्था की तैयारियां संतोषप्रद हैं और अंतिम रूप से आशातीत परिणाम मिलेंगे।
बैठक में तय हुआ कि,
    1.
सम्मेलन में डेलीगेट शुल्क को संशोधित कर ₹500.00 किया गया।
    2. प्रत्येक इकाई के सचिव अपनी इकाई का संबद्धता शुल्क विगत 3 वर्षों का प्रति सदस्य ₹50.00 के हिसाब से कुल राशि राज्य को भेजेंगे।
      3. स्मारिका में 10 जुलाई तक रचनात्मक सामग्री भेज देना होगा। अपेक्षित सामग्री/ विषय की रूपरेखा राज्य के व्हाट्सएप ग्रुप में साझा की जा चुकी है। यह सांकेतिक है तथापि इस वर्ष जिनकी जन्मशती है, जैसे डॉ. नामवर सिंह, अमरकांत, महाश्वेता देवी, सुकांत भट्टाचार्य आदि और साथ ही अखिल भारतीय प्रलेस के 90 साल पूरे होने पर तत्संबंधी आलेख, अन्य सामग्री, प्रलेस झारखंड के पूर्व सम्मेलनों, आयोजनों के फोटो, गतिविधियों की रिपोर्ट आदि स्मारिका में रहेंगे ताकि दस्तावेजीकरण किया जा सके।
     राज्य के साथी उत्कृष्ट सामग्री भेज कर सहयोग करें। इसके साथ ही स्मारिका में विज्ञापन संग्रह का कार्य भी मनोयोग से किया जाय। जो साथी इसमें समर्थ हैं वे अवश्य अपने स्तर से अधिकतम सहयोग करें।
      4. राज्य सम्मेलन में शामिल होने सभी सहमना संगठनों यथा, जलेस, जसम आदि को चिट्ठी (आमंत्रण पत्र) शीघ्र ही प्रेषित किया जाएगा। इप्टा तो सहोदरा ही है, अतः इप्टा के साथी आयोजन में हमारे साथ रहेंगे।
     5. अध्यक्ष मंडल के रणेंद्र जी ने पुनः बल दिया कि राज्य सम्मेलन में हर जिला से लेखकों का प्रतिनिधित्व हो, जो किसी भी भाषा या बोलियों (अंगिका, खोरठा, संताली, मुंडारी, बांग्ला, उर्दू ) में रचनाकर्म करते हैं। शर्त बस यही है कि वे प्रगतिशील विचार रखते हों। इसी तरह हम अपने संगठन का विस्तार कर पाएंगे।
     6. अगले रविवार को पुनः सभी साथी ऑनलाइन बैठक में उपस्थित रहेंगे।
     बैठक का संचालन और धन्यवाद राज्य महासचिव मिथिलेश ने किया। बैठक में कुल 15 साथी उपस्थित थे, जिनमें रामनंदन सिंह, प्रो. अहमद बद्र, रणेंद्र, मिथिलेश, कमल, अर्पिता, प्रज्ञा गुप्ता, फाल्गुनी मारिक कुशवाहा,  बिनय कुमार शर्मा, अनिता चौधरी, डॉ. बी एन ओहदार, पॉवेल कुमार, नियाज़ अख्तर, पार्थो बनर्जी और शेखर मल्लिक आदि रहे।

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