देवघर (शहर परिक्रमा)

पत्रकार पर हमले से भड़का आक्रोश, पुलिस की निष्क्रियता पर उठे सवाल

देवघर: मोहनपुर थाना क्षेत्र में कथित रूप से सक्रिय सुभाष मंडल और प्रमोद हेंब्रम गैंग के बढ़ते आतंक और पुलिस की निष्क्रियता को लेकर स्थानीय लोगों और पत्रकारों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। 26 अप्रैल 2026 को चोपामोड़ स्थित जैप-5 के समीप इंडियन पंच अखबार के पत्रकार मंटू यादव के साथ मारपीट और जान से मारने की धमकी की घटना के एक सप्ताह बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

    स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह गैंग क्षेत्र में वर्चस्व कायम करने के लिए रंगदारी और धमकी का सहारा ले रहा है। कई पीड़ितों और गवाहों द्वारा मार्च माह में ही लिखित शिकायतें देने के बावजूद पुलिस द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे इलाके में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।

गवाहों को मिल रही जान से मारने की धमकी
    बाराकोला गांव निवासी हरेकिशन मंडल ने 21 मार्च को थाना प्रभारी को दिए आवेदन में बताया कि 20 मार्च को जब वे टोटो लेकर देवघर जा रहे थे, तभी बाइक सवार सुभाष मंडल और प्रमोद हेंब्रम ने उन्हें रोककर धमकाया। आरोप है कि गवाही देने पर टोटो दुर्घटना करवाकर हत्या की चेतावनी दी गई।
    पीड़ित के अनुसार, 5 अप्रैल को फिर उनके साथ मारपीट की गई और धमकी दोहराई गई। उन्होंने अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) से भी गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

“केस वापस लो, नहीं तो एक्सीडेंट करा देंगे”
     एक अन्य मामले में, प्रणवीर मोहली ने आरोप लगाया कि 21 मार्च को सुभाष मंडल ने उन्हें केस वापस लेने के लिए धमकाया। इनोवा कार से आए आरोपी ने कथित रूप से कहा कि अगर केस नहीं उठाया गया तो सड़क हादसा करवाकर हत्या कर दी जाएगी।
प्रणवीर ने पहले ही सुभाष मंडल के खिलाफ मामला दर्ज कराया था और परिवार की सुरक्षा की मांग की थी, लेकिन पुलिस की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

घर में घुसकर दी गई धमकी
   नागराज मंडल ने बताया कि 19 मार्च को सुभाष मंडल उनके घर पहुंचा और कोर्ट में गवाही न देने की धमकी दी। विरोध करने पर गाली-गलौज और पूरे परिवार को खत्म करने की धमकी दी गई।

पत्रकारों में आक्रोश, कार्रवाई की मांग
पत्रकार मंटू यादव पर हमले के बाद स्थानीय पत्रकारों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि यदि पत्रकार ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी।
पत्रकारों और ग्रामीणों ने उच्च अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप कर आरोपियों की गिरफ्तारी, पीड़ितों की सुरक्षा और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

पुलिस की भूमिका पर सवाल
लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने से स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस की लापरवाही या संभावित मिलीभगत के कारण आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और लोगों में भय का माहौल बना हुआ है।
मोहनपुर क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को लेकर स्थिति चिंताजनक बनती जा रही है। यदि जल्द ही ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। अब सबकी नजर प्रशासन और पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी है।

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