भुखमरी के कगार पर घोरमारा, मालिक ने स्टॉफ से कहा- “जब दोकानदारिये नै छो, तबै तों की करभीं”
देवघर बासुकीनाथ के मध्य अवस्थित पेड़ा नगरी के नाम से मशहूर घोरमारा इनदिनों भुखमरी के कगार पर पहुंच गया है। इसका मुख्य कारण राजकीय श्रावणी मेला के दौरान इस रास्ते में बड़ी गाड़ियों के लिए नो एंट्री कर दिया जाना है। जिससे यहाँ के व्यवसायियों का व्यवसाय मुख्य सीजन में ही समाप्त हो गया। ऊपर से इन्होंने जो कच्चा माल पहले से इकठ्ठा किया था वो भी ख़राब हो रहा हैं।

जाने घोरमारा को
घोरमारा झारखण्ड के देवघर जिले के मोहनपुर प्रखंड का एक छोटा सा गांव हैं जो पिछले कुछ वर्षों से पेड़ा नगरी के नाम से विख्यात है। जिला मुख्यालय से लगभग 16 किलोमीटर दूर यह गांव देवघर बासुकीनाथ मुख्य सड़क पर होने, और यहाँ के पेड़ा कि अपनी विशिष्टता के कारण इसका नाम पेड़ा नगरी कहा जाने लगा।
हालिया मामला
मुख्य सड़क निर्माण और बाईपास सड़क बनने के बाद देवघर जिला प्रशासन ने इस सड़क को श्रावणी मेला के ऐन पहले बड़ी गाड़ियों के लिए नो एंट्री कर दिया। जिससे यहाँ पेड़ा व अन्य व्यवसायियों के लिए मुश्किल घड़ी आ गई। मुख्य सीजन में ही इनका व्यवसाय समाप्त हो गया। ऊपर से इन्होंने जो कच्चा माल पहले से इकठ्ठा किया था वो भी ख़राब हो रहा हैं।
क्या कहते हैं व्यवसाई

प्रियंशा पेड़ा दुकान के प्रॉपराइटर सियाराम मंडल कहते हैं कि घोरमारा में लगभग 400 पेड़ा दुकान हैं। जिसमे लगभग 100 करोड़ का व्यवसाय सिर्फ श्रावणी मेला में ही होता हैं। लेकिन श्रावणी मेला के ऐन पहले रोड बंद करने से पुरा व्यवसाय ही समाप्त हो गया। ऊपर से जो हमने कच्चा माल इकठ्ठा किया था वो भी ख़राब हो रहा हैं।

सुखाड़ी मंडल पेड़ा दुकान के विकास कुमार को लगता है कि जाम की समस्या से निजात पाने के लिए देवघर जिला प्रशासन ने इस क्षेत्र में नो एंट्री लगा दिया है। इसलिए उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि पिछले वर्ष घोरमारा नहीं बल्कि सहारा के चलते जाम की समस्या हो रही थी। हालांकि उन्होंने पत्रकारों के सामने वचन दिया कि अगर इस रास्ते में बड़ी गाड़ियों को रास्ता दिया जाता है तो हम पुरे घोरमारावासी एक्टिव होकर घोरमारा में जाम नहीं लगने देंगे।

शिवसागर पेड़ा दुकान की प्रॉपराइटर यशोदा देवी कहती हैं कि रास्ता बंद करने से सिर्फ घोरमारा बाजार को ही नुकसान नहीं हुआ हैं बल्कि आस पास के सैकड़ों गांव से जो लेबर मजदूरी करने आते हैं उन्हें भी काम नहीं मिल रहा हैं। प्रशासन के एक फैसले से इस पुरे क्षेत्र का रोजी रोजगार ही डूब गया।

थैला व्यवसाई शंकर कुमार साह कहते हैं कि लगभग 4 महीने से मैं श्रावणी मेला का इंतजार कर रहा था। इस दौरान कुछ कर्ज लेकर बाहर के बाजारों से थैला लाकर स्टॉक किया ताकि मेला में होलसेल थैला बेचकर मुनाफा कमाऊंगा। लेकिन सावन के चंद दिन पहले रोड बंद कर बाजार ही समाप्त कर दिया गया। अब आगे क्या होगा, भगवान ही जानें?
क्या कहते हैं कामगार

जमुनिया पंचायत के घुठिया दोंदिया गांव के लालू यादव जो घोरमारा बाजार काम की तलाश में पहुंचे पर उन्हें काम नहीं मिला। उन्होंने बड़े ही मायूस होकर कहा कि जहाँ मैं काम करता था वहाँ के मालिक ने “जब दोकानदारिये नै छो, तबै तों की करभीं” बोलकर काम से निकाल दिया।
क्या कहते हैं बुद्धिजीवी
घोरमारा के ही कुछ बुद्धिजीवी कहते हैं कि यहाँ लगभग 400 पेड़ा दुकान संचालन में है लेकिन 50 ने भी न अपना पंजीयन कराया है न ही सरकार को टैक्स देते हैं। ऐसे में सरकार को पता ही नहीं कि यह कितना बड़ा/छोटा बाजार है और जिला प्रशासन ने श्रावण मेला के दौरान ही सड़क बंद कर दिया है।
उन्होंने पेड़ा संचालकों को सलाह दिया कि जल्द से जल्द अपने दुकान का पंजीयन कराएं और रोड चालू करने की अपनी मांग सरकार तक पहुचायें तभी इस समस्या का हल निकल सकता है।

