देवघर (शहर परिक्रमा)

भाषा आंदोलन का इतिहास

21 फ़रवरी 1952 को तत्कालीन पाकिस्तान में बांग्ला को राज्य भाषाओं में शामिल करने की मांग को लेकर छात्रों और आम जनता ने सड़कों पर आंदोलन किया। पुलिस की गोलीबारी में रफ़ीक, जब्बार, शफिउर, सलाम और बरकत सहित कई लोग शहीद हुए।

अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस: 1999 में यूनेस्को ने 21 फ़रवरी को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के रूप में मान्यता दी, जो भाषा शहीदों के बलिदान के प्रति वैश्विक श्रद्धांजलि है।

बांग्ला भाषा प्रचलन अधिनियम: सभी स्तरों पर बांग्ला भाषा के उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए बांग्लादेश सरकार ने 1987 में बांग्ला भाषा प्रचलन अधिनियम जारी किया।

भाषा की उत्पत्ति और विकास: बांग्ला भाषा की उत्पत्ति मागधी प्राकृत और अपभ्रंश से हुई है। इस भाषा का प्राचीनतम प्रमाण ‘चर्यापद’ है।

विश्व में स्थान: वर्तमान में लगभग 28 करोड़ 50 लाख लोग बांग्ला को मातृभाषा के रूप में बोलते हैं, जो मातृभाषा बोलने वालों की संख्या के आधार पर इसे विश्व की छठी सबसे बड़ी भाषा बनाती है।

ध्रुपद (शास्त्रीय) भाषा का दर्जा: 2024 में भारत सरकार ने बांग्ला को ‘ध्रुपद (Classical) भाषा’ का दर्जा दिया, जो इसकी समृद्ध इतिहास और परंपरा को दर्शाता है।

लेखक रजत मुखर्जी