दीनबंधु उच्च विद्यालय में धूमधाम से मनाई गई रवीन्द्र जयंती
देवघर: स्थानीय दीनबंधु उच्च विद्यालय के रवीन्द्र सभागार में विश्वकवि रवींद्रनाथ ठाकुर की 165वीं जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में देवघर प्रधान डाकघर के डाकपाल रवि कुमार उपस्थित थे।

मुख्य अतिथि रवि कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि रवींद्रनाथ ठाकुर केवल एक महान कवि ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, शिक्षा और मानवता के प्रतीक थे। उन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से पूरे विश्व को प्रेम, शांति और मानवता का संदेश दिया। उनकी कृति ‘गीतांजलि’ के लिए उन्हें साहित्य का नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ, जिससे भारत का गौरव विश्वभर में बढ़ा। उन्होंने कहा कि ठाकुर का जीवन हमें सिखाता है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक संवेदनशील और आदर्श इंसान बनना भी है।
विद्यालय ट्रस्ट कमिटी के सदस्य शरदिंदु कुंडु ने कहा कि रवींद्रनाथ ठाकुर एशिया के पहले साहित्यकार थे जिन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वहीं बंगला कवि एवं विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्य प्रसून वसु ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में कविगुरु के विचारों को अपनाकर अनेक समस्याओं का समाधान संभव है।
हंसध्वनि कला केन्द्र के निदेशक एवं विद्यालय प्रबंधन समिति सदस्य विश्वनाथ बनर्जी ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि गुरुदेव के बहुमुखी योगदान को समझने के लिए एक जीवन भी कम है। उनके आदर्शों को जीवन में अपनाकर ही एक आदर्श नागरिक बना जा सकता है।
विद्यालय के प्रधानाध्यापक काजल कान्ति सिकदार ने विद्यार्थियों से महान विभूतियों के जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंतर्गत पूर्व में आयोजित रवीन्द्र निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। नवम वर्ग के निखिल कुमार दुबे को प्रथम, नील आनंद को द्वितीय तथा अष्टम वर्ग के अमन कुमार को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। विजेताओं को कविगुरु की श्रेष्ठ कहानियों की पुस्तकें भेंट की गईं, जबकि अन्य 24 छात्र-छात्राओं को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया।
अंत में मुख्य अतिथि, शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं विद्यार्थियों ने कविगुरु की तस्वीर पर पुष्प अर्पित किए। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

