कृषक गोष्ठी के माध्यम से किसानों को दी गई कृषि से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी
दुमका: आत्मा दुमका द्वारा गुरुवार को राष्ट्रीय खाद्य एवं पोषण सुरक्षा मिशन योजनान्तर्गत ग्राम-चांदोपानी, पंचायत-दिग्धी प्रखंड-दुमका में कृषक गोष्ठी का आयोजन किया गया।
कृषक गोष्ठी के माध्यम से उप परियोजना निदेशक संजय कुमार मंडल द्वारा कृषकों को धान की श्री विधि से खेती के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि धान की श्री विधि को धान की सघनीकृत प्रणाली भी कहा जाता है। उन्होने बताया कि श्री विधि से खेती करने में कम बीज 2 किलो प्रति एकड़ बीज की आवश्यकता होती है। इस विधि में 8-14 दिनों का बिचडा का प्रयोग करना चाहिये। इस विधि से खेती करने में कम पानी खेत की मिट्टी को नमीयुक्त रखना है।इसमें कम उर्वरक की आवश्यकता होती है। श्री विधि में रोपाई के समय खेत गीला होना चाहिये या खेत में एक इंच से कम पानी की आवश्यकता होती है। इस विधि में पौधों से पौधों की दूरी 25 सेमी एवं कतार से कतार की दूरी 25 सेमी रखनी चाहिये।

उन्होने बताया की बीज बोने से पूर्व बीज का बीजोपचार अवश्य कर लेना चाहिये। सबसे पहले प्रति एकड़ की दर से 2 किलो बीज ले लें।उसके बाद आधा बाल्टी पानी में नमक का घोल बनाये। उक्त घोल में बीजों को डाल दें जो खराब बीज होगा वह उपर आ जायेगा एवं स्वस्थ बीज पानी के नीचे बैठ जायेगा। इस तरह खराब बीज को अलग कर ले। अच्छे बीज को निकालकर उसे साफ पानी से 2-3 बार धो लें।जिससे नमक का अंश हट जायेगा।साफ बीज को फफूंदनाशक दवा (वैभिस्टीन) से उपचारित करना है। वैभिस्टीन की 2 ग्राम प्रति किलो बीज से उपचारित करना है। उपचारित करने के बाद बीज को नम बोरे से ढक कर 24 घंटे के लिये अंकुरण हेतु छोड़ दें।अंकुरित बीज का नर्सरी में डाला जाता है एवं नर्सरी के उपर पुआल से ढंक देना है। इस विधि में प्रति पौधे कल्ले की संख्या 30-70 तक होती है जिससे धान का उत्पादन अच्छा होता है।
इस दौरान कृषकों को धान, मक्का एवं रागी का बीज का वितरण भी किया गया।कृषक गोष्ठी में आत्मा के उप परियोजना निदेशक संजय कुमार मंडल, दुमका प्रखंड के प्रखंड तकनीकी प्रबंधक दीपक चन्द्र साह, सहायक तकनीकी प्रबंधक भारती देवी, सीफा सदस्य सुष्मिता सोरेन एवं कृषकगण उपस्थित थे।

