देवघर (शहर परिक्रमा)

मन्नत हुई पूरी, पहुंचे बाबा दरबार

आस्था तर्क नहीं गढ़ती, वह तो अपना सुख-दुख अपने इष्टदेव के झोली में अर्पित कर इक्षित फल का इंतजार करती हैं। और इसी इक्षित फल की जब पूर्ति हो जाती हैं तब आस्था और गहरी हो जाती है।
     ऐसा ही एक वाक्या तब नजर आया जब कोलकाता के रहने वाले संजीत मल्लिक लगभग 60-70 किलो के भारी भरकम कांवर में अपने 2.5 वर्षीय बच्चा (श्रेयांश) को लेकर देवघर पहुंचे।

     पूछने पर उन्होंने इसे अपनी मन्नत बताया।

क्या थी मन्नत?

श्रेयांश के साथ संजीत मल्लिक

संजीत मल्लिक ने बताया कि मेरे बड़े भाई को तीन पुत्री हैं, एक भी पुत्र नहीं। मेरी भी शादी के पश्चात् पहले पहल लक्ष्मी स्वरूपा पुत्री ही पैदा हुई। इसलिए नाते रिश्तेदारों और आस पड़ोस में वंश चलाने को लेकर कानाफुसी होने लगी।
     तब हमने बाबा बैद्यनाथ से पुत्र की मन्नत मांगी। बाबा ने हमारी सुन ली और श्रेयांश के रूप में पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। अब हम बाबा बैद्यनाथ के प्रति अपनी आस्था जताने कांवर लेकर देवघर पहुंचे हैं।

कैसे पहुंचे बाबाधाम

   उन्होंने बताया कि हम 12 लोगों ने जिसमे 4 महिला भी हैं, बारी बारी से कांवर लेकर आ रहे हैं। और भोलेनाथ के कृपा से 5 दिन में देवघर पहुंच गए।
   उन्होंने बताया कि हमारे साथ राकेश मल्लिक, विजय मल्लिक, राहुल, लालू राउत, आनंद राउत इत्यादि भी कांवर उठाने में सहयोग कर रहे हैं।