जयंती पर याद किए गए मुंशी प्रेमचंद
दुमका: संथाल परगना महाविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा गुरुवार को हिंदी भाषा एवं साहित्य जगत के दिग्गज साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद जी की जयंती का आयोजन किया गया। हिंदी के प्रमुख कथाकार एवं चिंतनकर्ता प्रेमचंद की जयंती को मनाने के लिए इस वर्ष हिंदी विभाग ने ‘आज युवाओं के लिए प्रेमचंद’ विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया। इस आयोजन में मुख्य वक्ता के रूप में संत जेवियर महाविद्यालय महारो के हिंदी विभाग के प्राध्यापक डॉ. महेश देव उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का आरंभ अतिथियों के स्वागत से हुआ जिसमें सर्वप्रथम प्राचार्य डॉ. के.पी.यादव ने मुख्य वक्ता को अंग वस्त्र और पौधा देकर उनका स्वागत किया। विभाग अध्यक्ष प्रो. पुष्पा सोरेन ने स्वागत वक्तव्य प्रस्तुत किया तथा प्रेमचंद की रचनात्मक वैशिष्टय पर प्रकाश डाला। विषय के संदर्भ में मुख्य वक्ता डॉ.महेश देव ने कहा कि प्रेमचंद हमेशा प्रासंगिक रहे हैं। इसी कारण से वह युवाओं को प्रेरणा प्रदान करते हैं, उनकी रचनाओं के माध्यम से आज के युवा संवेदनशील होते हैं और समाज के अनेक प्रसंगों की जानकारी प्राप्त करते हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ.के .पी.यादव ने कहा कि हमारा समाज में भेदभाव के अनेक तत्व विद्यमान है। प्रेमचंद उनको अपनी रचनाओं के माध्यम से बड़े गहरे जा करके दिखाते हैं। आज की वह जिस तरह से तेजी से भाग रहे हैं उनको ठहरकर सोचने के लिए प्रेमचंद अपनी रचनाओं के माध्यम से एक स्थान देते हैं। महाविद्यालय के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. कुमार सौरभ ने प्रेमचंद की रचनाओं का उल्लेख करते हुए यह बताया कि कैसे उनके जीवन पर सामाजिक समझ निर्मित करने के लिए उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। इतिहास विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. कमल शिवाकांत हरि ने अपनी बात रखते हुए कहा कि प्रेमचंद अपने रचना काल के समय से लेकर आज तक प्रासंगिक हैं इसलिए हमें उन्हें ज्यादा से ज्यादा पढ़ना चाहिए। कार्यक्रम का विषय प्रवेश विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. यदुवंश यादव ने कराया और उन्होंने यह बताया कि आज के युवा को सामाजिक मूल्य समझने के लिए प्रेमचंद को ज्यादा से ज्यादा पढ़ना चाहिए। उनकी रचनाओं में सामाजिक जवाबदेही का यथार्थ दिखाई पड़ता है इसलिए जब हम अपनी जिम्मेदारी को तलाश रहे होते हैं और विभिन्न प्रकार के संवेदना से होते हुए खुद को खोज रहे होते हैं तब प्रेमचंद अपनी रचनाओं के द्वारा उपस्थित होते हैं और हमें उदाहरण प्रदान करते हैं इसलिए प्रेमचंद को आज ज्यादा से ज्यादा पढ़े जाने की आवश्यकता है। इनके द्वारा मंच संचालन भी किया गया तथा कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. अजीत कुमार सिंह के द्वारा किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के अन्य प्राध्यापकों के साथ-साथ बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे।
संवाददाता:- आलोक रंजन

