कोडरमा (शहर परिक्रमा)

डीएवी कोडरमा में मनाया गया राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस

कोडरमा: डीएवी पब्लिक स्कूल, कोडरमा में राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस बड़े उत्साह और भव्यता के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बच्चों ने अंतरिक्ष की अद्भुत दुनिया को जीवंत कर दिया।
    कार्यक्रम की शुरुआत नन्हे-मुन्नों (कक्षा एलकेजी से कक्षा दूसरी तक) की मनमोहक प्रस्तुति से हुई। बच्चे ग्रह, अंतरिक्ष यात्री, रॉकेट, चाँद और अंतरिक्ष मिशनों का रूप धरकर विद्यालय आए। इनमें रजत रंजन सिंह, अनिक देव, दर्षित, पुनित और सर्वोत्तम असीम एस्ट्रोनॉट बने। सम्पूर्णा राजपूत, सान्या सोनी और अंशुमान ने चंद्रयान-3 का रूप धारण कर सबका मन मोह लिया। श्रीहन सान्डिल्य आदित्य L1, प्रियांश राज गगनयान, हर्षित निराला चंद्रयान-2, निहाल मेहता रॉकेट और आरव साइंटिस्ट बने। शिवान्स ने एलियन और रॉकेट दोनों रूपों में सभी का ध्यान आकर्षित किया। इसी तरह अधिराज और लक्ष्य मंगल ग्रह, विराट सिन्हा शनि, शिखा नेप्च्यून (अरुण), जबकि अनेक बच्चों ने चाँद, तारे और सूर्य का रूप धरकर कार्यक्रम में रंग भर दिए।

   बच्चों ने अंतरिक्ष विषय पर आकर्षक मॉडल और पेंटिंग्स प्रस्तुत कीं। कविता आरोही गुप्ता और खुशी तिवारी द्वारा गाई गई, जबकि कुमुद सिंह ने हिंदी और शाम्भवी ने अंग्रेजी में प्रभावशाली भाषण दिया। मंच संचालन आभ्या श्री ने किया।


    सीनियर वर्ग में शुभांशु शुक्ला, अंतरिक्ष यात्री की उपलब्धि की सराहना की गई।चंद्रयान-3 की अंतरिक्ष यात्रा का वर्णन किया तथा शिवांग आयुष ने भविष्य के गगनयान मिशन पर प्रस्तुति दी। प्रेरणा ने अंतरिक्ष विषयक प्रश्नोत्तरी का संचालन किया। रुद्र प्रताप सिंह चंदेल ने बच्चों को रोचक विज्ञान तथ्य बताए। अंग्रेजी भाषण में अरुणेश रंजन ने राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला। जिज्ञासु पांडेय ने चंद्रयान 1, 2, 3, गगनयान मिशन, मंगलयान और अंतरिक्ष यात्रियों से जुड़े मॉडल प्रदर्शित किए। मंच संचालन श्रेयसी और नंदिनी ने संयुक्त रूप से किया।


   विज्ञान के शिक्षक मनोज कुमार सिंह ने अंतरिक्ष दिवस से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ साझा कीं और छात्रों को विज्ञान व अनुसंधान में गहरी रुचि लेने के लिए प्रेरित किया।


    विद्यालय के प्राचार्य कृष्ण कुमार सिंह ने अपने संदेश में कहा कि भारत में राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग की स्मृति में मनाया जाता है। भारत ने इतिहास रचते हुए न केवल चंद्रमा पर उतरने वाले देशों में चौथा स्थान प्राप्त किया, बल्कि चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में उतरने वाला विश्व का पहला देश बना। यह दिन छात्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह न केवल विज्ञान और अंतरिक्ष की जानकारी देता है, बल्कि जिज्ञासा, कल्पनाशक्ति और खोज की भावना भी जगाता है। उन्होंने कहा कि आर्यभट्ट उपग्रह से लेकर चंद्रयान और मंगलयान जैसी उपलब्धियाँ इस बात का प्रमाण हैं कि कठिन परिश्रम, ज्ञान और संकल्प से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं।
  प्राचार्य ने कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान देने वाले शिक्षकों—श्वेता सिंह, अभिषेक कुमार, मनोज कुमार सिंह, लक्की पाठक, कीर्ति कुमारी, संध्या कुमारी एवं पूरे विद्यालय परिवार की सराहना की।
   अंत में धन्यवाद ज्ञापन वरिष्ठ शिक्षक कुमार सतीश सिंह ने किया।