देवघर सेंट्रल स्कूल में ग्रैंड पेरेंट्स डे का आयोजन
देवघर: बुजुर्ग घरों की आन बान और शान होती हैं। कहा जाता है कि घर बिना बुजुर्ग के घर नहीं बन सकता है क्योंकि बुजुर्गों में ईश्वर का वास होता है इसलिए देवत्व का वास करने के लिए परिवार में बुजुर्ग रहना ही चाहिए। परिवार को एक रखने में और रचनात्मक बनाने में बुजुर्गों का मार्गदर्शन हमेशा फलदायी होता है। हमनें नुक्लेअर परिवार को बढ़ावा देकर अपने समाज में व्रिद्धाश्रम कि संख्या को बढ़ाने का कार्य किया, साथ ही साथ नैतिक मूल्यों की कमी के दंश को भी झेलने को विवश होना पड़ रहा है। बच्चों की दिशाहीनता भी इन्हीं कारणों का फल है। अतः परिवार और समाज को प्रभावशाली बनाने के लिए बुजुर्गों का मार्गदर्शन अवसंभावित है। बुजुर्ग इतिहास व वर्तमान के प्रतिमूर्ति होते हैं। आइये हम प्रत्येक दिवस को उनके सम्मान में समर्पित करें और परिवार तथा समाज में पुनः नैतिक मूल्यों का सूत्रपात करें।
उपरोक्त सभी बातों को स्थानीय देवघर सेंट्रल स्कूल में ग्रैंड पेरेंट्स डे के अवसर पर बुजुर्गों का सम्मान करते हुए प्राचार्य ने कही।

विदित हो कि 1965 से प्रत्येक वर्ष 7 सिंतबर को दुनिया में बुजुर्गों के सम्मान में इस दिवस का आयोजन किया जाता है। हिरणा स्थित देवघर सेंट्रल स्कूल में भी आज ग्राण्डपरेन्ट्स डे पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ आगंतुकों के द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। रजत ने सभी आगंतुकों का स्वागत अपने स्वागत भाषण से करते हुए बतलाया कि हमें अपने माता पिता के साथ अपने दादा दादी का भी वात्सल्य चाहिए इसलिए हम प्रतिदिन उनके साथ रहना पसंद करते हैं। उनकी नैतिक मूल्यों की शिक्षा हमें समग्र मानव बनने में सहायक सिद्ध होगा। सोनाक्षी ने दादा दादी के सम्मान में एक कविता का पाठ किया जिसका अर्थ बुजुर्गों के अमूल्य योगदान के ऋण से हम कभी उऋण नहीं हो सकते हैं। कक्षा नर्सरी व के जी के बच्चों ने वेलकम इन आवर स्कूल दादीमाँ गाने पर भाव नृत्य प्रस्तुत कर सभी का स्वागत किया। कक्षा प्रथम के छात्र प्रिंस ने अंग्रेजी में कविता का स्वर वाचन किया। पुनः नर्सरी, केजी व द्वितीय के बच्चों ने माहौल को हास्य प्रदान करने के लिए दादी अम्मा, दादी अम्मा गुस्सा छोड़ो गीत पर आकर्षक नृत्य प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण के रूप में बच्चों के द्वारा एक लघु नाटिका को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया और हमें यह सोचने पर विवश कर दिया कि हम अंध दौड़ में अपनी विरासत व संस्कृति को भूलते जा रहे हैं। बुजुर्ग अविभावकों के लिए अनेक प्रकार के फन गेम का भी आयोजन किया गया जिसमें उन्होंने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया और अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए आकर्षक पुरस्कार जीते। अंत में अविभावकों के द्वारा केक काटकर कार्यक्रम का अंत किया गया। पता ही नहीं चला कि यह उत्सवी माहौल कितनी जल्दी कैसे समाप्त हो गया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में शिम्पी कुमारी, श्रद्धा कुमारी, नेहा कुमारी, जोया सरकार, सोनम, सृजा, आकांक्षा, अरविंद व अन्य का योगदान रहा। उपरोक्त सभी बातों कि जानकारी विद्यालय के मीडिया प्रभारी दिलीप कुमार पांडेय ने दी।

