विलुप्त चिड़िया
नीले आकाश में विचरण करने वाले पक्षियों को देखना किसे अच्छा नहीं लगता, लेकिन कई प्रमुख संस्थाओं व संगठनो द्वारा हाल में जारी किये गए रिपोर्ट पर गौर करें तो ज्ञात होगा कि संसार में पक्षियों के कई ऐसे प्रजाति हैं जो विलुप्त होने के कगार पर है जा पहुँची है। आज जंगलों व पर्वतों के लगातार नष्ट होने, तालाव और जल स्रोतों के सूखने तथा कंक्रीट का जंगल बनने पक्षियों के आश्रय स्थल नष्ट होते गए। देखा जाए तो आज कई लाभप्रद पक्षी विलुप्त हो चुके हैं या धीरे-धीरे घटते जा रहे हैं। इसमें एक समय बड़ी संख्या में नजर आनेव्राले किंग फिशर या कठफोड़वा नामक पक्षी आज दिखाई नहीं देते हैं। आज पनकौड़ी, डाहुक, घरहेन, वन मुरगी भी बिलकुल विलुप्त हो चुके हैं।

पर्यावरण में सभी प्राणियों के बीच चिड़िया एक महत्त्वपूर्ण प्राणी है, जिससे वातावरण के संतुलन में उन तमाम चिड़ियों को खास योगदान है। चिड़िया मनुष्य के साथ-साथ पर्यावरण के भी अच्छे मित्र हैं। आम तौर पर हमारे पास बहुतेरें संख्या में रह रही गौरैया और कौआ भी कम दिखते हैं। पारिस्थितिकी का चक्र काफी पहले से मनुष्यों ने बिगाड़ रखा है और अब लगता है मानो कि पृथ्वी पर जीवन के अंत होने का प्रारंभ हो चुका है।


