नवरात्रि की पूजा में माँ दुर्गा के समर्पित भक्त: बलराम पोद्दार
नवरात्रि का पावन पर्व, जो शक्ति की आराधना का प्रतीक है, हर वर्ष लाखों भक्तों को माँ दुर्गा के चरणों में खींच लाता है। इस वर्ष (2025) शारदीय नवरात्रि 22 सितंबर से आरंभ होकर 2 अक्टूबर तक चलेगी। इस पर्व के दौरान देश भर में भक्तजन व्रत, उपवास, जप और कठोर साधना के माध्यम से माँ की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। ऐसे ही एक समर्पित भक्त हैं बलराम पोद्दार, जिनकी भक्ति माँ दुर्गा के प्रति आस्था का एक प्रतीक है।
बलराम पोद्दार: एक परिचय
देवघर जिले के सारवां में निवास करने वाले बलराम पोद्दार एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं जो राजनीती से भी जुड़ाव रखते हैं। वहीं बलराम माँ दुर्गा के भी अनन्य भक्त हैं।
बलराम पोद्दार हर वर्ष नवरात्रि के दौरान अपने घर में बने मंदिर में पूजा का आयोजन करते हैं, जिसमें परिवार के सभी सदस्य शामिल होते हैं।
उनकी भक्ति केवल पूजा तक सीमित नहीं, बल्कि वे माँ दुर्गा के नाम पर कई सामाजिक कार्य भी करते हैं।

नवरात्रि में उनकी पूजा पद्धति
बलराम पोद्दार की नवरात्रि पूजा एक अनूठा संगम है परंपरा और आधुनिकता का। वे नवरात्रि के नौ दिनों को “शक्ति जागरण सप्ताह” के रूप में मनाते हैं, जहां हर दिन माँ दुर्गा के एक-एक रूप की विशेष पूजा की जाती है। उनकी पूजा पद्धति निम्नलिखित है:
• प्रथम दिन (शैलपुत्री पूजा): वे सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा स्नान करते हैं और माँ शैलपुत्री को लाल चंदन व कमल के फूल अर्पित करते हैं। मंत्र जप: “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नमः” का 108 बार उच्चारण।
• द्वितीय से चतुर्थ दिन (ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा): इन दिनों वे व्रत रखते हैं, केवल फलाहार ग्रहण करते हैं। शाम को दुर्गा सप्तशती का पाठ आयोजित करते हैं, वे मानते हैं कि माँ कूष्मांडा की पूजा से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं।
• पंचम दिन (स्कंदमाता पूजा): इस दिन वे विशेष रूप से माँ स्कंदमाता की आराधना करते हैं, जो मातृत्व और संरक्षण की देवी हैं। पूजा में सफेद वस्त्र, दूध और शहद का प्रसाद चढ़ाया। मंत्र: “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं स्कंदमातायै नमः”।
• अष्टमी और नवमी: अष्टमी पर कन्या पूजन और नवमी पर दुर्गा हवन उनका मुख्य आकर्षण होता है। वे हवन में घी, तिल और जड़ी-बूटियों की आहुति देते हैं, मंत्र जप: “ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी, दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।”
वे कहते हैं कि माँ दुर्गा की पूजा केवल रस्म नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। यह शक्ति हमें बुराइयों से लड़ने की ताकत देती है।
बलराम पोद्दार की भक्ति केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक कल्याण से जुड़ी है। उनकी यह पूजा माँ दुर्गा के “महिषासुरमर्दिनी” स्वरूप से प्रेरित है, जो नारी शक्ति का प्रतीक है। उनका कहना है कि महिला सशक्तिकरण के लिए सनातन धर्म में माँ दुर्गा की पूजा से बेहतर आयोजन नहीं हो सकता, जहाँ महिलाओं/कन्या की पूजा और सम्मान का सन्देश दिया जाता है।

