दीनबंधु उच्च विद्यालय ने मनाया सरदार पटेल की जयंती
देवघर: आज दिनांक 31अकटूबर शुक्रवार 12 बजे अपराह्न में दीनबंधु उच्च विद्यालय के रवीन्द्र सभागार में भारत के प्रथम उप प्रधानमंत्री सह गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती सादे समारोह में मनाई गई। इस शुभ अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में दीनबंधु मध्य विद्यालय प्रबन्ध समिति के सचिव निर्झर चक्रबर्ती, डॉ प्रदीप कुमार सिंह देव, प्रधानाध्यापक काजल कान्ति सिकदार, सहयोगी शिक्षक शिक्षिकाओं में जीतेन्द्र कुमार चन्द्र, उदय कुमार मंडल, मनीषा घोष, भारती कुमारी, मुनेश्वर प्रसाद यादव, हिन्दी विद्यापीठ बी एड महाविद्यालय के प्रशिक्षणार्थियों में मनीषा कुमारी, ऋषिका शर्मा,अमित कुमार, राहुल कुमार यादव, मोहित कुमार झा,ए एस बी एड महाविद्यालय के नेहा सिन्हा, रजनी आनन्द, प्रभा कुमारी, ऋचा कुमारी, सौरभ कुमार के अलावे विद्यालय के सभी छात्र छात्राएं उपस्थित थे।

मौके पर दीनबंधु मध्य विद्यालय के सचिव निर्झर चक्रबर्ती ने कहा- लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की स्मृति में उनके जन्मदिन 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में प्रति वर्ष मनाया जाता हैं। राष्ट्रीय एकता दिवस का ऐलान 2014 में किया गया, इसे वल्लभभाई पटेल के राष्ट्र के प्रति समर्पण को याद में रखकर तय किया गया। विवेकानंद शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव ने कहा-स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद क़रीब पाँच सौ से भी ज़्यादा देसी रियासतों का एकीकरण सबसे बड़ी समस्या थी। 5 जुलाई 1947 को सरदार पटेल ने रियासतों के प्रति नीति को स्पष्ट करते हुए कहा कि ‘रियासतों को तीन विषयों – सुरक्षा, विदेश तथा संचार व्यवस्था के आधार पर भारतीय संघ में शामिल किया जाएगा।’ धीरे धीरे बहुत सी देसी रियासतों के शासक भोपाल के नवाब से अलग हो गये और इस तरह नवस्थापित रियासती विभाग की योजना को सफलता मिली।
विद्यालय के प्रधानाध्यापक काजल कांति सिकदार ने कहा- भारत के तत्कालीन गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने भारतीय संघ में उन रियासतों का विलय किया था जो स्वयं में संप्रभुता प्राप्त थीं। एकता में सबसे बड़ा बाधक स्वहित हैं आज के समय में स्वहित ही सर्वोपरि हो गया है। आज जब देश आजाद हैं आत्म निर्भर हैं तो वैचारिक मतभेद उसके विकास में बेड़ियाँ बनी पड़ी हैं। आजादी के पहले इस फुट का फायदा अंग्रेज उठाते थे और आज देश के सियासी लोग। देश में एकता के स्वर को सबसे ज्यादा बुलंद स्वतंत्रता सेनानी लोह पुरुष वल्लभभाई पटेल ने किया था।

