देवघर (शहर परिक्रमा)

कोलकाता में ‘कृष्टिनंदन पुरस्कार’ से नवाजे जायेंगे डॉ. प्रदीप सिंह देव

देवघर: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता स्थित सुरंननंदन भारती के बैनर तले 32वाँ अखिल भारतीय सम्मेलन एवं दीक्षांत समारोह में विवेकानंद शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान के केंद्रीय अध्यक्ष सह ओमसत्यम इंस्टिट्यूट ऑफ फिल्म, ड्रामा एंड फाइन आर्ट्स के निदेशक डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव को इंदुमती सभागृह, जादवपुर के सभागार में कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में सराहनीय योगदान हेतु आगामी 4 दिसम्बर को ‘कृष्टिनंदन पुरस्कार’ की मानद उपाधि से अलंकृत एवं विभूषित की जाएगी।

जानकारी हो कि सुरंनंदन भारती एक अनुसंधान संस्थान है। 1994 में स्थापित, इसके सहयोगी संस्थान अब तक देश के लगभग हर राज्य में स्थापित हो चुके हैं। यह 1 फ़रवरी 1994 को सोसायटी पंजीकरण अधिनियम 1961 के तहत पंजीकृत हुआ था। त्रिपुरा, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, केरल, राजस्थान, गोवा और पश्चिम बंगाल में इसे अभूतपूर्व सफलता मिली है। विदेशों से भी संपर्क और संवाद जारी है।
   वहीं बकौल डॉ. प्रदीप का जन्म कोलकाता, पश्चिम बंगाल में हुआ था। उनकी पढ़ाई स्थानीय दीनबन्धु मध्य विद्यालय से शुरू हुई थी। छातना राजगढ़, बाँकुड़ा, पश्चिम बंगाल एवं काशीपुर पंचकोट राजबाड़ी, पुरुलिया, पश्चिम बंगाल के वंशज डॉ. प्रदीप चार वर्ष की उम्र में अपने पिता के एवं सन 1997 को अपनी माता के स्नेह से वंचित हो गए थे। दोनों वैराग्य ले चुके थे। डॉ. देव बचपन में ही अपने पाँचो भाई को भी खो चुके हैं। दो बहनें- माला सिंह छपरा में एवं बकुल चक्रवर्ती, बाँकुड़ा में रहती हैं। उन्हें ढाई आखर पत्र लेखन प्रतियोगिता में राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम 2018-19, राज्य स्तरीय में दो बार प्रथम, एकबार तृतीय, बाग्देवी सम्मान पुरस्कार, भारत गौरव, अंकन भारती, अंकन नन्दन, चित्र भारती, चित्र नन्दन, आवृत्ति भारती, आवृत्ति नन्दन, नाट्य भारती, नाट्य नन्दन, नाट्य मणि, स्वामी विवेकानंद राष्ट्रीय शिखर सम्मान, दियारा फेलोशिप सम्मान पुरस्कार, विद्या वारिधि, प्रताप सम्मान पुरस्कार, नन्दन श्री, विद्या सागर, काव्यदीप, पाञ्चजन्य सेवा श्री सम्मान पुरस्कार, गोस्वामी तुलसीदास राष्ट्रीय शिखर सम्मान, श्रीनिवास रामानुजन राष्ट्रीय शिखर सम्मान, जॉर्ज ग्रियर्सन राष्ट्रीय शिखर सम्मान, भारतीय कला सपूत सम्मान, चंद्रशेखर वेंकटरमण राष्ट्रीय शिखर सम्मान, चित्रकला शिरोमणि, राष्ट्रभाषा गौरव, भारतीय कला सपूत सम्मान एवं अन्य पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। उनकी पुस्तकें बैद्यनाथ गमाहात्म्य (बांग्ला), बैद्यनाथ ग्लोरी, अमृतवर्षी मानव रत्न (काव्य संकलन), भक्तों की मुराद पूरी करते हैं दानी बाबा बैद्यनाथ, इक्यावन रोचक तथ्य, रामानुजन मैथ्स फॉर्मूला फॉर जूनियर्स, सी. वी. रमण साइंस डिक्शनरी फॉर जूनियर्स, पारो की याद में (काव्य संकलन, ताजमहल में लोकार्पित), डेडिकेशन (काव्य संकलन), वूमेन ऑफ द ईरा (201 कविताओं का संकलन), भारती गुड़ इंग्लिश एवं अन्य बाजार एवं कुछ अमेज़न में उपलब्ध है। उन्होंने अनेक राष्ट्रीय सेमिनार, भोपाल में राष्ट्रीय दूरबीन निर्माण कार्यशाला में भागीदारी निभाई हैं। उन्हें ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय, बारबाडोस के प्रधानमंत्री मिया मोटली, मिशनरीज़ ऑफ चैरिटीज के सुपीरियर जनरल सिस्टर मैरी जोसेफ, स्व. राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम, स्व. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी व अन्य ने शुभकामनायें प्रेषित कर चुके हैं। वे तत्कालीन संचार मंत्री रवि शंकर, ओडिशा के तत्कालीन राज्यपाल प्रो. गणेशी लाल से करकमलों से भी सम्मानित हो चुके हैं। अपने संस्थान के माध्यम से अभी तक डॉ. देव एक लाख से अधिक व्यक्तियों को सम्मानित कर चुके हैं।