देवघर (शहर परिक्रमा)

राज्य स्थापना दिवस व धरती आबा बिरसा मुण्डा की जयंती पर मंत्री हफीजूल हसन ने गिनाई सरकार की उपलब्धियां, बताया भविष्य की योजनाएं

देवघर: धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा के 150वें जन्मदिवस और झारखंड स्थापना दिवस की रजत जयंती के अवसर पर आज दिनांक 15 नवम्बर 2025 को भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान मुख्य अतिथि मंत्री, जल संसाधन, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग हफीजूल हसन, सारठ विधायक उदय शंकर सिंह, झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष प्राणेश सोलोमन, देवघर उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी नमन प्रियेश लकड़ा, पुलिस अधीक्षक सौरभ, उप विकास आयुक्त पीयूष सिन्हा एवं उपस्थित जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों द्वारा नगर निगम स्थित धरती आबा बिरसा मुण्डा के प्रतीमा पर माल्यार्पण किया गया, जिसके पश्चात मुख्य अतिथि द्वारा मुख्य समारोह स्थल पर जिलास्तरीय कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया गया।

     कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि हफीजूल हसन ने धरती आबा बिरसा मुण्डा को नमन करते हुए सभी को झारखण्ड राज्य स्थापना दिवस की बधाई देते हुए कहा कि आज हम सभी के लिए गौरव का दिन है, साथ हीं आज के दिन की महत्ता को समझते हुए ये संकल्प लेने की आवश्यकता है कि हम एक दूसरे का सहयोग करते हुए अपने कार्यों से झारखण्ड का नाम और भी गौरवान्वित करें। आगे झारखण्ड के स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर मंत्री द्वारा जानकारी दी गयी कि 113 करोड़ की लागत से होटल बैद्यनाथ विहार होटल, 4 स्टार निर्माण पीपी मोड में, बुढ़ैयी जलाशय, कृष्णा सागर डेम, सिकटिया बराज व पुनासी डैम के अलावा अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग द्वारा साईकिल वितरण योजना वित्तीय वर्ष 2025-26 कुल-69304, वितरित-46114, आयवृद्धि योजना – वित्तीय वर्ष 2024-25 में 07, 2025-26 में आयवृद्धि योजना प्रक्रियाधीन है, मरांग गोमके पारदेशीय छात्रवृति योजना वित्तीय वर्ष 2024-25 में 03 एवं वर्ष 2025-26 में 03 कुल 06 तथा 2025-26 में 03 से बढ़ा कर 06 किया गया है, अल्पसंख्यक छात्रावास निर्माण वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल 55 अबतक 111 योजनाओं की स्वीकृति। कुल 50.00 करोड़ रू० का बजट है, मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना- झारखण्ड सरकार द्वारा अबतक कुल 146 करोड़ रूपया अनुदान दिया गया, अल्पसंख्यक समुदाय के कब्रिस्तानों को विगत वर्ष 250 कब्रिस्तान की स्वीकृति। अबतक 2500 से ज्यादा कब्रिस्तानों की घेराबंदी की जा चुकी है, अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय गढ़वा, हजारीबाग, सरायकेला-खरसावां, राँची, साहेबगंज तथा देवघर जिलों में रू० 88.83 करोड़ के प्राक्कलित राशि पर 06 (छः) अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय की स्वीकृति प्रदान की गयी है। शेष जिलों से भी प्रस्ताव की मांग की गई है, कोचिंग योजना अल्पसंख्यक कोचिंग योजना के तहत एजेन्सी के चयन की कार्रवाई की जा रही है,  हज यात्रा वर्ष 2025 में हज यात्रा पर गये झारखण्ड के हज यात्रियों की कुल संख्या 1298 थी, हज 2026 में यात्रियों की कुल संख्या 1578 है। 1578 हज यात्रियों की देखभाल के लिए 11 स्टेट हज इन्स्पेक्टर भेजे जाएंगे एवं PMJVK/MSDP- अल्पसंख्यक बाहुल्य क्षेत्रों में वित्तीय वर्ष 2025-26 भारत सरकार को लगभग 300 योजना स्वीकृति हेतु भेजने की कार्रवाई की जा रही है।
     जल संसाधन विभाग के योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि सुवर्णरखा बहुउद्देशीय परियोजना अन्तर्गत चांडिल डैम, गालूडीह बराज एवं खरकई बराज से निःसृत मुख्य नहरों से किसानों को जल्द से जल्द सिंचाई लाभ देने के लिये अवशेष वितरणियों का कार्य भूमिगत पाइप लाइन (Under Ground Pipe Line, UGPL) से कराया जा रहा है। खरकई बराज से खरकई बांयी लिफ्ट सिंचाई एवं सीतारामपुर जलाशय Augmentation योजना का कार्य पूर्ण किया गया है। इस योजना से 3700 हे० भूमि में पटवन की सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है एवं सीतारामपुर जलाशय में 101 MLD पेयजल दिया जा रहा है, जिससे जमशेदपुर में पेयजल संकट को दूर किया जा सका है। लघु सिंचाई अंतर्गत देवघर जिले के कुल 44 योजनाओं सहित झारखण्ड में कुल 727 योजनाओं की स्वीकृति दी गई है। जिसमें 453 चेकडैम, 46 उद्दह सिचांई एवं 228 मध्यम सिंचाई है। वर्ष 2000 में झारखण्ड राज्य की स्थापना के पश्चात् राज्य में कुल 6.27 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता थी जो 2024-25 में कुल 10.12 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता प्राप्त किया गया। जल संसाधन विभाग द्वारा पुराने सिंचाई योजनाओं के जीर्णाेद्धार हेतु योजना कार्यान्वित की गयी है। इस योजना के तहत् राज्य की विभिन्न योजनाओं में ERM (Extension Renovation and Modernization) का कार्य कराया गया है। जिससे 74 सिंचाई योजनाओं का पुनरूद्धार एवं लाईनिंग कार्य पूर्ण कर 96,091 हे० में सिंचाई सुविधा पुनर्बहाल की गयी है। झारखण्ड राज्य की स्थापना के पश्चात् वर्ष 2004-05 में रू० 43.57 करोड़ राजस्व की प्राप्ति हुई थी। दिनांक-01.04.2023 से नया जल दर प्रभावी हो जाने के उपरांत वर्ष 2024-25 में रू० 270.53 करोड राजस्व की प्राप्ति हुई है। इस वर्ष माह अक्टूबर तक इस मद में रू० 566.00 करोड़ की प्राप्ति हुई है एवं इस वित्तीय वर्ष में रू० 1120 करोड़ राजस्व (रू० 760 करोड़ बकाया राशि सहित) की प्राप्ति होने की संभावना है। इसके अलावे अन्य सभी विभागों में बेहतर ताल-मेल एवं राज्यवासियों के हित को ध्यान में रखकर अनेक प्रकार की योजनाएँ चल रही है। कुल मिला कर सरकार, समाज के प्रत्येक क्षेत्र के विकास के लिए कृत संकल्पित है एवं हर एक व्यक्ति के हित का खयाल रखते हुए काम कर रही है। आगे माननीय मंत्री द्वारा सुयोग्य लाभुकों के बीच सोना सोबरन धोती साड़ी योजना 06, वनाधिकार अधिनियम के अन्तर्गत वन पटा का वितरण 16, जेएसएलपीएस के अन्तर्गत व्यक्तिगत ऋण 01, झारखण्ड आन्दोलनकारी 11, कृषि की विभिन्न योजनाओं के अन्तर्गत कृषि उपकरणों का वितरण, बाबा साहेब अम्बेडकर आवास 03, मनरेगा 02, प्रतिभागियों के बीच प्रमाण पत्र का वितरण 10 किया गया।
     कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी नमन प्रियेश लकड़ा द्वारा स्वागत संबोधन के दौरान सभी का आभार प्रकट करते हुए मंत्री सम्मानित जनप्रतिनिधिगण, मिडियाबंधुगण, अधिकारीगण और प्रिय जिलावासियों को झारखंड के 25वाँ स्थापना दिवस एवं भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के शुभकामनाएं दी। आगे उन्होंने कहा कि आज हम 25 वर्षों की विकास यात्रा का उत्सव मना रहे हैं, और साथ ही धरती आबा बिरसा मुंडा को नमन कर रहे हैं, जिन्होंने जल, जंगल और जमीन की रक्षा तथा आदिवासी अस्मिता के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उनका साहस और बलिदान सदैव हमारी प्रेरणा रहेगा। देवघर केवल एक जिला नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और ऊर्जा का केंद्र है। बाबा बैद्यनाथ की पवित्र भूमि पूरे देश और विश्व को जोड़ती है। यहाँ की सरलता, सेवा-भाव, धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक विविधता देवघर को अद्वितीय बनाती है। श्रावणी मेला की विशाल परंपरा के अलावा पर्यटन की अपार संभावनाएँ यहां है। वहीं शहरी और ग्रामीण जीवन की समृद्ध विरासत और सामाजिक भाईचारे की मिसाल के कारण झारखंड की असली पहचान का प्रतिनिधित्व करता पिछले समय में राज्य सरकार द्वारा कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कार्य किए गए हैं, पर्यटन और तीर्थ विकास, श्रावणी मेला को अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और सुचारू बनाना, बैद्यनाथ धाम परिसर और मुख्य मार्गों पर सुविधाओं का विस्तार, यात्रियों की भीड़ प्रबंधन और आपदा-प्रतिबंध उपायों को मजबूत करना, बुनियादी ढाँचा एवं कनेक्टिविटी, सड़कों, पेयजल, बिजली और शहरी सुविधाओं का सुधार, ग्रामीण कनेक्टिविटी को प्राथमिकता, सार्वजनिक स्थानों की सफाई और व्यवस्थित रखरखाव, शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण, स्कूलों में गुणवत्ता सुधार पर विशेष ध्यान, मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना, पोषण कार्यक्रमों को तेज गति देना, आजीविका और जनकल्याण, स्वयं सहायता समूहों के सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रयास, युवाओं को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार अवसर उपलब्ध कराना, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना, कानून-व्यवस्था और नागरिक सुरक्षा, शांतिपूर्ण एवं समन्वित वातावरण सुनिश्चित करने हेतु कड़े एवं संवेदनशील कदम, संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी नागरिक-अनुकूल पुलिसिंग की दिशा में लगातार प्रयास रहेगा। आगे भागीदारी आधारित विकास यथा देवघर का विकास तभी संभव है जब प्रशासन, जनप्रतिनिधि और जनता-तीनों एक साथ मिलकर काम करें। साथ ही जिला प्रशासन का मूल सिद्धांत है पारदर्शिता, त्वरित सेवा और संवेदनशीलता। जनसुनवाई, फील्ड निरीक्षण, तकनीक समर्थ सेवाएँ और समस्या निवारण की त्वरित प्रक्रिया हमारे कामकाज का प्रमुख आधार हैं।
भविष्य के लिए देवघर का संकल्प….
इस स्थापना दिवस पर हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि-
देवघर को स्वच्छ, सुरक्षित, आधुनिक और सांस्कृतिक रूप से सशक्त बनाएँ,
पर्यटन और तीर्थ विकास को एक नई दिशा दें
युवाओं और महिलाओं को अधिक अवसर दें।
ग्रामीण और जनजातीय समुदायों को विकास की मुख्यधारा से जोड़े
और पर्यावरण, जंगल तथा प्राकृतिक धरोहरों का संरक्षण सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जाए।
जिला प्रशासन पूर्ण निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ देवघर को झारखंड का मॉडल जिला बनाने की दिशा में सतत कार्य करता रहेगा।
   धरती आबा बिरसा मुंडा का जीवन संदेश देता है कि- साहस और सेवा ही समाज को आगे बढ़ाते हैं। उसी प्रेरणा से, आइए हम सब मिलकर देवघर और झारखंड को विकास की नई ऊँचाइयों तक ले जाएँ।
     इसके अलावा उप विकास आयुक्त पीयूष सिन्हा ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
कार्यक्रम के दौरान उपरोक्त के अलावे नगर आयुक्त रोहित सिन्हा, अपर समाहर्त्ता हीरा कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी मधुपुर राजीव कुमार, जिला जनसम्पर्क पदाधिकारी, जिला नजारत उप समाहर्ता, जिला परिवहन पदाधिकारी, जिला कल्याण पदाधिकारी, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, जिला आपूर्ति पदाधिकारी, सहायक निदेशक, सामाजिक सुरक्षा, जिला कृषि पदाधिकारी, जिला पशुपालन पदाधिकारी, जिला गव्य विकास पदाधिकारी, जिला सहकारिता पदाधिकारी, कार्यपालक अभियंता पेयजल एवं स्वच्छता प्रमण्डल, जिला पंचायत राज पदाधिकारी, जिला उद्यान पदाधिकारी, जिला योजना पदाधिकारी, विभिन्न प्रखण्डों के प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, अंचलाधिकारी, डीपीएम जेएसएलपीएस, सहायक जनसम्पर्क पदाधिकारी व संबंधित विभाग के अधिकारी जनप्रतिनिधि कर्मी आदि उपस्थित थे।