गांधी विचार विभाग के अध्यक्ष ने देवघर में ‘गांधी संग्रहालय’ की ज़रूरत बताई
देवघर: आज दिनांक 27 नवंबर को तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के गांधी विचार विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ.विजय कुमार देवघर पहुंचे। स्थानीय करनीबाद स्थित ‘देवघर डेंटल क्लिनिक’ में जाने-माने दंत चिकित्सक एवं ‘झारखण्ड शोध संस्थान’ के निदेशक डॉ.राजीव रंजन, संस्थान के सचिव उमेश कुमार और जाने-माने पक्षी विज्ञानी रजत मुखर्जी ने उनका स्वागत किया। उन्हें पुष्प गुच्छ,अंगवस्त्र और ‘वतनपरस्त’ पुस्तक की प्रति भेंट की। ‘झारखण्ड शोध संस्थान’ के सचिव उमेश कुमार ने उनसे देवघर में ‘गांधी संग्रहालय’ की स्थापना की दिशा में मार्गदर्शन करने की अपील की।

डॉ.विजय कुमार ने कहा कि इस बात के दस्तावेज़ी प्रमाण उपलब्ध हैं कि एक समय गांधी को उनके बंगाली मित्रों ने बैद्यनाथधाम में बसाने का मन बनाया था। ऐतिहासिक कारणों से गांधी बैद्यनाथधाम में नहीं बस सके, लेकिन इस शहर के साथ उनके भौतिक और वैचारिक संबंधों के अनेक आयाम रहे हैं। सुधी समाज को कम-से-कम इस शहर से जुड़ी गांधी की यादों को ही सहेज लेना चाहिए। इसके लिए ‘गांधी संग्रहालय’ अथवा इतिहासघर एक उपयोगी उपक्रम हो सकता है।उन्होंने संस्थान के निदेशक डॉ.राजीव रंजन को इस दिशा में सार्थक पहल करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि यदि देवघर में ‘गांधी संग्रहालय'(इतिहासघर) बनता है तो उनका भरपूर मार्गदर्शन संस्थान को मिलेगा। ‘गांधी संग्रहालय’ के बनने से एक दर्शनीय चीज़ भी इस शहर को मिल जाएगी। वहां पुरावशेषों के साथ गांधी के विचारों की झलक भी मिलेगी।
पक्षी विज्ञानी रजत मुखर्जी ने कहा कि उनके पास गांधीजी से जुड़े बहुमूल्य डाक टिकटों,करेंसियों और सिक्कों का संग्रह मौजूद हैं। चरखों का भी संग्रह है।उचित मंच स्थापित होने पर वे भी अपने संग्रह को नयी पीढ़ी के लिए साझा कर सकते हैं। नयी पीढ़ी गांधी को और बेहतर तरीके से समझ सके,इसके लिए वे हमेशा संस्थान के साथ खड़े रहेंगे।

