अनाम हैदरः संघर्ष, साहस और सफलता की प्रेरक कहानी
अंतर्राष्ट्रीय विकलांगता दिवस विशेष
अंतर्राष्ट्रीय विकलांगता दिवस हर साल 3 दिसंबर को मनाया जाता है, जिसकी घोषणा संयुक्त राष्ट्र ने 1992 में की थी। इसका मुख्य उद्देश्य विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों, कल्याण और समाज में उनकी समान भागीदारी को बढ़ावा देना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, वैश्विक आबादी का लगभग 16% हिस्सा विकलांग है, जो विभिन्न बाधाओं का सामना करते हैं।

इन्ही में से एक हैं देवघर के अनाम हैदर। जिन्होने शारीरिक बधाओं को पार करते हुए अपना एक अलग मुकाम बनाया है।
अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित पैरा एथलीट, मार्केटिंग में MBA, राज्य एवं राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित व्यक्तित्व अनाम हैदर विकलांगता अधिकारों की सशक्त आवाज़ के रूप में उभर कर सामने आए हैं।
कई राष्ट्रीय पदक, एशिया पैसिफिक स्पेशल ओलंपिक (2013) में अंतर्राष्ट्रीय ब्रॉन्ज मेडल, विभिन्न राज्य सम्मान और सेल्फ एडवोकेसी फोरम्स ऑफ़ इंडिया के असिस्टेंट कोषाध्यक्ष के रूप में महत्वपूर्ण योगदान… ये सब अनाम की उपलब्धियों का प्रमाण हैं।
अपने संघर्ष, दृढ़ निश्चय और समाज में समावेश की भावना के साथ, अनाम ने हमेशा यह संदेश दिया है कि विकलांगता कमजोरी नहीं, बल्कि एक अलग क्षमता है।
आज अंतर्राष्ट्रीय विकलांगता दिवस पर अनाम हैदर ने पूरे समाज, प्रशासन, और देश के युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण अपील जारी की है।
अनाम हैदर का संदेश:-
1) उन्हें समझो: हर व्यक्ति की क्षमता, भावनाएँ और आवश्यकता अलग होती है। संवेदनशीलता ही समावेश की शुरुआत है।
2) क्षमता के अनुसार नौकरी दो PwD youth को उनकी ताकत और योग्यता के आधार पर रोजगार मिले।
3) पढ़ाई में प्रोत्साहित करो शिक्षा ही स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता का सबसे बड़ा माध्यम है।
4) कला और हुनर सिखाओ कौशल विकास से उनका आत्मविश्वास और अवसर दोनों बढ़ते हैं।
5) कला के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर भागीदारी कराओ। Abilympics, Sabal Awards, Jhoom International जैसे प्लेटफॉर्म पर उन्हें आगे बढ़ने दो।
6) खिलाड़ी हैं तो खेल को ही करियर बनाओ, योग्य स्पोर्ट्समैन को प्रोफेशनल ट्रेनिंग, स्कॉलरशिप और नौकरी मिले।
7) डिग्री के अनुसार नौकरी दो। योग्यता को नज़रअंदाज़ न होने दो; अवसर बराबर मिलें।
8) प्रशासन निजी कंपनियों में अवसर बढ़ाए स्थानीय और राज्य स्तर पर छोटे-बड़े उद्योगों में PWD रोजगार के कोटे सुनिश्चित हों।
9) समाज में बराबरी की भागीदारी बनाओ PWD सिर्फ लाभार्थी नहीं, देश के निर्माण में भागीदार हैं।
10) घरों में बंद न करें उन्हें बाहर निकलने, सीखने और आगे बढ़ने का पूरा मौका दें।
11) शोषण और भेदभाव से बचाओ कानून, समाज और परिवार सभी को सुरक्षा की जिम्मेदारी लेनी होगी।
12) अगर गलत राह पर न चले तो रोको टोको नहीं मार्गदर्शन दें, निरुत्साहित न करें।
13) सम्मान और इज्ज़त दो सम्मान आत्मविश्वास बढ़ाता है, भेदभाव तोड़ता है।
14) स्थानीय प्रशासन/उपायुक्त से मिलकर कल्याण कराओ अधिक योजनाएँ और सुविधाएँ तभी लागू होंगी जब प्रशासन से मांग लगातार उठेगी।

