श्री रामचरितमानस एवं गीता ज्ञान यज्ञ क़े प्रथम दिवस का कार्यक्रम संपन्न
देवघर: विलियम्स टाउन अवस्थित बीएड कॉलेज मैदान में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा श्री रामचरितमानस एवं गीता ज्ञान यज्ञ का प्रथम दिवस का कार्यक्रम दीप प्रज्ज्वलित करके आरंभ किया गया जिसमें देवघर क़े पूर्व विधायक नारायण दास, समाजसेवी सुरज झा, रीता चौरसिया, मनोज सिंह, संजय सिंह, सीमा झा, अशोक सर्राफ, रूपा श्री सहित कई अन्य वरिष्ठ लोग सम्मिलित हुए।

आज आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी अमृता भारती ने मानव जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि श्री रामचरितमानस की गाथा त्याग और समर्पण की गाथा है। साध्वी जी ने कहा कि रामचरितमानस एक जीव के अंतरधट में उद्धारित होती है क्योंकि रामचरितमानस की हर घटना और हर पत्र एक इशारा एक संकेत करता है कि जीवन में सीता आत्मा है और श्री राम परमात्मा है। हर स्त्री पुरुष का शरीर लंका है जीवात्मा जो इस शरीर रूपी लंका में बंद है और वह सदा श्री राम रूपी परमात्मा से मिलना चाहती है लेकिन रावण यह होने नहीं देता। आत्मा रूपी सीता जब परमात्मा स्वरूप श्री राम से मिलने को आतुर होती है तब हनुमान जैसे संत मिलते हैं जो वह ज्ञान रूपी मुद्रिका प्रदान करते हैं जिसे पाते ही सब भ्रम नष्ट हो जाता है तत्पश्चात प्रभु श्री राम और मां सीता बूंद और सागर की भांति मिल जाते हैं।
गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं कि जिस प्रकार मां सीता प्रभु राम से अलग होकर शोक ग्रस्त हुई ठीक इसी प्रकार से हर मानव जो कि ईश्वर का अंश है वह भी दुखी है करण यह है कि वह परमात्मा रूपी राम से विलग है, जब जीवन में किसी पुर्ण संत का पदार्पण होता है तो वह सिर्फ प्रभु राम की बातें, कथा कहानियां नहीं करते बल्कि प्रभु राम से मिलन की युक्ति तरीका भी बता दिया करते हैं। इसलिए रामचरितमानस कहती है कि ”संत मिलन सम सुख जग नाही”।
शिष्य स्वामी धनंजयनंद जी ने कहा कि आज मनुष्य त्रिविध तापों से बचने के लिए अनेकों प्रयास कर रहा है लेकिन सुख शांति प्राप्त नहीं कर पा रहा क्योंकि जिन सांसारिक साधनों में सुख ढूंढ़ रहा है वहां क्षणिक सुख है स्थाई नहीं। इसलिए कागभुसुंडि जी रामचरितमानस में कहते हैं कि
राम विमुख न जीव सुख पावे।। वह दुख भी अच्छे होते हैं जो हमें प्रभु से जोड़ दे। इसलिए संत कबीर साहिब जी ने कहा की ‘मन लागो मेरा यार फकीरी में जो सुख पाया राम भजन में सो सुख नाहीं अमीरी में’। कार्यक्रम को संगीत मय बनाने में गायक गोपाल, तबला वादक राम उदगार, पैड पर चंदन, साध्वी सरिता भारती और प्रीति भारती की भूमिका महत्वपूर्ण रही। कार्यक्रम का समापन प्रभु की पावन आरती एवं प्रसाद वितरण से किया गया।

