अनिल कुमार शकुंतला देवी विद्यालय में पं मदन मोहन मालवीय जयंती मनाई गई
देवघर: मोहनपुर स्थित अनिल कुमार शकुंतला देवी आवासीय विद्यालय में पंडित मदन मोहन मालवीय की जयंती मनाई गई। मौके पर मुख्य अतिथि वेक्सो इंडिया के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव ने कहा- 25 दिसंबर, 1861 को पं. मदनमोहन मालवीय का जन्म इलाहाबाद में हुआ था। पत्रकारिता, वकालत, समाज सुधार, मातृभाषा तथा भारत माता की सेवा में अपना जीवन समर्पित करने वाले मालवीय जी ने राष्ट्र की सेवा के साथ ही साथ नवयुवकों के चरित्र-निर्माण के लिए और भारतीय संस्कृति की जीवंतता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना की। उनका मानना था कि संसार के जो राष्ट्र उन्नति के शिखर पर हैं, वे शिक्षा के कारण ही हैं।

वेक्सो इंडिया के सदस्य विकास कुमार केशरी ने कहा- मदन मोहन मालवीय की देन चिरस्मरणीय है। वे आज भी हर भारतीय के दिल में हैं। विद्यालय के सचिव पालन झा ने कहा- मालवीय जी को स्वतंत्रता संग्राम में सशक्त भूमिका तथा हिंदू राष्ट्रवाद के प्रति उनके समर्थन के लिए भी जाना जाता है। सन् 1886 में कोलकाता में कांग्रेस के दूसरे सत्र में अपने पहले विचारोत्तेजक भाषण के बाद ही वे राजनीति में छा गए थे। उन्होंने सन् 1887 से हिन्दी अंग्रेजी समाचार पत्र ‘हिन्दुस्तान’ का संपादन करके दो-ढाई साल तक जनता को जागरूक करने का कार्य किया। विद्यालय की प्राचार्या मधुमाला कुमारी ने कहा- मदन मोहन मालवीय संस्कृत, हिन्दी तथा अंग्रेजी भाषाओं के ज्ञाता थे। उनका निधन 1946 में हुआ तथा वे देश को स्वतंत्र होते नहीं देख सके थे। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रणेता महामना पंडित मदनमोहन मालवीय को मरणोपरांत सन् 2014 में भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ दिया गया। बी. एड. की छात्रा सुकीर्ति झा ने कहा- मालवीय जी ने पांच वर्ष की आयु में संस्कृत भाषा में प्रारंभिक शिक्षा लेकर प्राइमरी परीक्षा उत्तीर्ण करके इलाहाबाद के जिला स्कूल में पढ़ाई की तथा 1879 में म्योर सेंट्रल कॉलेज, जिसे आजकल इलाहाबाद विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाता है से 10वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की तथा छात्रवृत्ति लेकर कोलकाता विश्वविद्यालय से सन् 1884 में बी.ए. की उपाधि प्राप्त की। उनका विवाह 16 वर्ष की आयु में मीरजापुर के पं. नंदलाल की पुत्री कुंदन देवी के साथ हुआ था। सुयश झा ने कहा- मदन मोहन मालवीय अपने सात भाई-बहनों में पांचवें पुत्र थे। उनके पिता संस्कृत भाषा के प्रकांड विद्वान थे और श्रीमद्भागवत की कथा सुना कर आजीविका का निर्वाहन करते थे।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों के साथ साथ, विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिका जयराम सिंह, विशाल कुमार झा, रिंकी कुमारी, मुन्नी कुमारी, प्रीति कुमारी की भागीदारी थी।

