क्रिसमस डे निबंध में रजत मुखर्जी जबकि रंगभरो प्रतियोगिता में वाणी, अंजलि व पूनम अव्वल
देवघर: स्थानीय विवेकानंद शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान एवं योगमाया मानवोत्थान ट्रस्ट के युग्म बैनर तले क्रिसमस डे के अवसर पर निबंध लेखन एवं रंगभरो प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया था। सर्व साधारण के लिए ग्रुप डी में, ईसा मसीह एवं बड़ा दिन शीर्षक निबंध लेखन प्रतियोगिता में शहर के जाने माने पर्यावरणविद रजत मुखर्जी को प्रथम, मधुपुर की निकिता खातून को द्वितीय जबकि जसीडीह की रागिनी कुमारी को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। ग्रुप ए, वर्ग प्ले से द्वितीय तक, रंगभरो प्रतियोगिता में देवघर संत फ्रांसिस स्कूल की वाणी प्रिया को प्रथम, अन्य शिक्षन संस्थान के अंजन कुमार एवं रंजीत कुमार को क्रमशः द्वितीय एवं तृतीय स्थान, वर्ग तृतीय से षष्ठ ग्रुप बी में भारती विद्यापीठ की अंजलि कुमारी को प्रथम, सुप्रभा शिक्षा स्थली के आर्यन केशरी को द्वितीय व जसीडीह के प्रीतम कुमार को तृतीय स्थान, वर्ग सप्तम से दशम तक ग्रुप सी में भारती विद्यापीठ की पूनम कुमारी को प्रथम, आशुतोष बालिका उच्च विद्यालय, रोहिणी की जाह्नवी कुमारी को द्वितीय एवं पालोजोरी की खुशबू कुमारी को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ है। सभी विजेताओं को 28 दिसम्बर को होटल न्यू ग्रैंड के सिद्धिविनायक बैंक्वेट हॉल के भव्य सभागार में संस्थान के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव एवं अन्य अतिथियों के करकमलों से पुरस्कृत किया जायेगा।

मौके पर डॉ. देव ने कहा कि भारत त्योहारों का देश है, जहां सभी समुदायों के लोग मिल-जुलकर विभिन्न प्रकार के त्योहार मनाते हैं। दिवाली, होली, राखी की ही तरह क्रिसमस भी एक खास पर्व है। यह वैसे तो क्रिश्चियन समुदाय के लोगों का पर्व है लेकिन अन्य धर्मों के लोग भी इसे मनाते हैं। क्रिश्चियन समुदाय के लोग हर साल 25 दिसंबर के दिन क्रिसमस का त्योहार मनाते हैं। यह ईसाइयों का सबसे बड़ा त्योहार है। इसी दिन प्रभु ईसा मसीह या जीसस क्राइस्ट का जन्म हुआ था इसलिए इसे ‘बड़ा दिन’ भी कहते हैं। प्रथम पुरस्कार विजेता रजत मुखर्जी ने कहा-क्रिसमस पर बच्चों के लिए सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र होता है सांताक्लॉज, जो लाल और सफेद कपड़ों में बच्चों के लिए ढेर सारे उपहार और चॉकलेट्स लेकर आता है। यह एक काल्पनिक किरदार होता है जिसके प्रति बच्चों का विशेष लगाव होता है। ऐसा कहा जाता है कि सांताक्लॉज स्वर्ग से आता है और लोगों को मनचाही चीजें उपहार के तौर पर देकर जाता है। यही कारण है कि कुछ लोग सांताक्लॉज की वेशभूषा पहनकर बच्चों को भी खुश कर देते हैं।

