कोडरमा (शहर परिक्रमा)

डीएवी कोडरमा में वीर बाल दिवस श्रद्धा, गौरव और राष्ट्रभाव के साथ मनाया गया

कोडरमा: पी. वी. एस. एस. डीएवी पब्लिक स्कूल, झुमरी तिलैया में वीर बाल दिवस श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाया गया। यह दिवस सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी के साहसी पुत्रों—साहिबजादा जोरावर सिंह एवं साहिबजादा फतेह सिंह—के अद्वितीय बलिदान की स्मृति में मनाया जाता है। इन बाल वीरों ने अत्याचार और अमानवीय दबावों के सामने झुकने के बजाय धर्म, सत्य और मानव मूल्यों की रक्षा हेतु अपने प्राणों का उत्सर्ग कर दिया।

   इस अवसर पर कक्षा सातवीं की प्रत्यूषा ने अंग्रेज़ी में तथा जैनब मीर ने हिंदी में वीर बाल दिवस के महत्व, उपलब्धियों एवं साहिबजादों के जीवन से जुड़े तथ्यों पर प्रभावशाली वक्तव्य प्रस्तुत किया। कक्षा पाँचवीं की आयुषी बर्नवाल ने भावपूर्ण कविता पाठ किया। कक्षा नौवीं के परीक्षित ने सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी के माध्यम से विद्यार्थियों का ज्ञानवर्धन किया।
   कार्यक्रम के अंतर्गत अविनाश सिंह, अमरनाथ पांडे, सक्षम कुमार, दिव्यांश वर्मा, देव कुमार, अंशराज, उपांशु राज एवं अंकुर सिंह द्वारा वीर बाल दिवस पर आधारित एक सशक्त नाटक का मंचन किया गया। नाटक के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि हमें देश की सांस्कृतिक विरासत, मूल्यों, एकता और अखंडता की रक्षा हेतु सदैव दृढ़ संकल्पित रहना चाहिए तथा साहिबजादों के त्याग, शौर्य और राष्ट्रप्रेम से प्रेरणा लेनी चाहिए।
     वीर बाल दिवस के अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य कृष्ण कुमार सिंह ने अपने संदेश में कहा कि यह दिवस हमें स्मरण कराता है कि देश और धर्म की रक्षा के लिए आयु नहीं, बल्कि अटूट साहस और दृढ़ संकल्प की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि यह घटना भारतीय इतिहास की अत्यंत हृदयविदारक घटनाओं में से एक है, जिसमें अपने पौत्रों की शहादत का समाचार सुनकर माता गुजरी ने भी अपने प्राण त्याग दिए।
उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा वर्ष 2022 में यह घोषणा की गई कि प्रत्येक वर्ष 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस मनाया जाएगा, ताकि देश के बच्चे साहिबजादों के बलिदान से परिचित हो सकें और उनसे प्रेरणा लें। यह दिवस हमें साहस, सत्यनिष्ठा, ईमानदारी, आत्मसम्मान और दृढ़ता जैसे मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित करता है। गुरु गोविंद सिंह जी के इन दोनों छोटे पुत्रों ने मुगल शासनकाल में अत्यंत विपरीत परिस्थितियों में भी अपने धर्म और विश्वास पर अडिग रहकर असाधारण वीरता का परिचय दिया। धर्म परिवर्तन के लिए डाले गए अमानवीय दबावों के बावजूद उन्होंने अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और अंततः क्रूरता का शिकार हुए। उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों को नैतिकता, साहस और देशभक्ति का अमर संदेश देता है।
    कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के शिक्षक अनिल कुमार, रोविन देव वर्मा, सत्य प्रकाश तिवारी एवं गिरजा शंकर पात्रो का सराहनीय योगदान रहा।