देवघर (शहर परिक्रमा)

देवघर एयरपोर्ट पर यात्री सुरक्षा हेतु सीपीआर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

देवघर एयरपोर्ट पर यात्री सुरक्षा और आपातकालीन तैयारी को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक कदम उठाते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), देवघर द्वारा एक व्यापक कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण एयरपोर्ट निदेशक तथा एयरपोर्ट ऑपरेटर टीम के सक्रिय सहयोग और समन्वय से संपन्न हुआ।

     इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में एयरपोर्ट के विभिन्न एजेंसियों और विभागों की उत्साहपूर्वक भागीदारी रही, जिनमें फायर एवं रेस्क्यू विभाग, ग्राउंड हैंडलिंग एजेंसियां, इंडिगो तथा अन्य परिचालन और सहायक स्टाफ शामिल थे। यात्रियों की अधिक आवाजाही और एयरपोर्ट की संवेदनशील परिचालन प्रकृति को ध्यान में रखते हुए, इस प्रशिक्षण का उद्देश्य अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों को आवश्यक जीवनरक्षक कौशल से लैस करना था, ताकि वे विशेष रूप से अचानक होने वाले हृदयाघात जैसी चिकित्सीय आपात स्थितियों में प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया कर सकें।
     जानकारी हो कि यह प्रशिक्षण AIIMS देवघर द्वारा अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के सहयोग से चलाए जा रहे एक व्यापक जन-जागरूकता अभियान का हिस्सा है।
     इस अवसर पर AIIMS टीम ने बताया कि “आउट-ऑफ-हॉस्पिटल कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में सामुदायिक तैयारी को मजबूत करने के उद्देश्य से, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), देवघर, अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के सहयोग से हैंड्स-ओनली कम्युनिटी सीपीआर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन कर रहा है। यह प्रशिक्षण सत्र कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ प्रो. (डॉ.) नितिन गंगाने के नेतृत्व में आयोजित किया गया, जिसे डॉ. राखी गौर (प्रोजेक्ट लीड एवं सहायक प्रोफेसर, कॉलेज ऑफ नर्सिंग, AIIMS देवघर) द्वारा प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर अंजलि कुमारी शॉ और नर्सिंग ऑफिसर प्रेरणा रावत के सहयोग से संचालित किया गया।”

   हैंड्स-ओनली सीपीआर प्रशिक्षण कार्यक्रम 12 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए तैयार किया गया है, जिसमें अचानक हृदयाघात के शिकार व्यक्ति को पेशेवर चिकित्सा सहायता मिलने तक या अस्पताल पहुंचने तक तुरंत छाती पर दबाव (चेस्ट कंप्रेशन) देने की तकनीक सिखाई जाती है। इस पहल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए डॉ. राखी गौर ने बताया कि यह कार्यक्रम केवल तकनीकी प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिकों को आपात स्थिति में त्वरित और आत्मविश्वास के साथ कार्रवाई करने के लिए सशक्त बनाने का प्रयास है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशिक्षित बाईस्टैंडर (मौके पर मौजूद लोग) पीड़ित के जीवन को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
प्रशिक्षण सत्र के दौरान प्रतिभागियों को विस्तृत प्रदर्शन के बाद सीपीआर मैनिकिन पर स्वयं अभ्यास करने का अवसर दिया गया, जिससे प्रत्येक प्रतिभागी को विशेषज्ञों की निगरानी में व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ। प्रशिक्षण का संवादात्मक स्वरूप प्रतिभागियों में स्पष्टता, आत्मविश्वास और वास्तविक परिस्थितियों में तकनीकों को लागू करने की तैयारी सुनिश्चित करने में सहायक रहा।