देवघर (शहर परिक्रमा)

देवघर सेंट्रल स्कूल में विज्ञान प्रदर्शनी का आयोजन

देवघर: आज दिनांक 07.02.26 को हिरणा अवस्थित देवघर सेंट्रल स्कूल में विज्ञान प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी का उदघाटन प्राइवेट स्कूल सोशल वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रेम कुमार व मैत्रेय स्कूल के निदेशक सोमेश दत्त मिश्रा ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया।

   मौके पर मुख्य अतिथिद्वय ने कहा कि जो कुछ भी हो बच्चों ने अपने शिक्षकों के मार्गदर्शन में बहुत कुछ बताया, सुना व सीखा। यह सीख उनके लिए स्थाई होगी। आज के बच्चे हमसे बहुत आगे हैं। थोड़े से दिशा निर्देश में वे अपनी क्रियाशीलता को मूर्त रूप प्रदान कर सकते हैं।

वहीं विद्यालय के प्राचार्य सुबोध झा ने कहा कि प्रायोगिक शिक्षा सदा सैद्धांतिक शिक्षा से बेहतर होती है। बच्चे किताबों में पढ़कर जितना सीखते हैं उससे कहीं ज्यादा देखकर समझकर पूछकर और चर्चाकर सीखते हैं। महान शिक्षाविद, समावेशी शिक्षा के सशक्त पक्षधर राजऋषि आचार्य सुदर्शन जी महाराज के सानिध्य में संचालित देवघर सेंट्रल स्कूल सदा से ही बच्चो को कक्षा के परिसीमा  से बाहर निकालकर शिक्षित करने का पक्षधर रहा है। यहां बच्चे किताबों का अध्ययन कर सीखते हैं साथ ही प्रयोगों एवं वादविवाद के द्वारा विषय वस्तु को अधिगत करते हैं। एतदर्थ समय समय पर यहां अलग अलग विषयों की प्रदर्शनी लगाई जाती है। आज विद्यालय परिसर में सामाजिक विज्ञान प्रदर्शनी इसी परंपरा में आयोजित की गई।

     प्रदर्शनी के दौरान विद्यालय के छात्र पीयूष कुमार ने चीन की दीवार की प्रतिमूर्ति का प्रदर्शन किया और उसके आकार प्रकार आदि की विशद जानकारी दी। आयुष ने सात आश्चर्यो में से एक माचू पिचू की जानकारी अपने प्रारूप के माध्यम से दी। सुफियान और सुमित कुमार ने चिचेन इटचज,  मो ताज और रणवीर ने ताजमहल, अर्णव , पीयूष एवं रविन्द्र ने पेट्रा, मंतशा, आरोही तथा नंदनी ने कॉलेजियम, अमित और आकाश ने क्राइस्ट दि रिडीमर, अनामिका एवं बुलबुल ने भारत के विभिन्न लोकनृत्य का जीवंत प्रदर्शन किया। सोनू एवं बिट्टू ने पवन ऊर्जा, अफ्फान , मनीष, शौर्य एवं आदित्य ने स्मार्ट सिटी के स्वरूप को प्रदर्शित किया। आर्यन, सचिन व सिद्धांत ने सेंट्रल विस्टा के प्रारूप का वर्णन किया। रिया व लक्ष्मी ने सौर्यमंडल की संरचना की जानकारी दी। नेहा ने वीर स्वतंत्रता सेनानियों के प्रदर्शन कर विस्तृत जानकारी दी। हिमांशु, प्रशांत एवं रौनक ने सिंधु घाटी सभ्यता का चित्रण किया। शहबाज एवं आयुष ने भारत के विभिन्न पर्व  के आयोजन की जानकारी दी।आयुष सिंह ने हमारे वायुमंडल की संरचना को दिखलाया। धरा एवं साक्षि ने जलचक की कार्यात्मक वयाख्या की।

    कार्यक्रम को सफल बनाने में सुश्री सृजा का अमूल्य योगदान रहा। इस अवसर पर अन्य शिक्षक शिक्षिका एवं बड़ी संख्या में अविभावक उपस्थित थे। उपरोक्त बातों की जानकारी विद्यालय के मीडिया प्रभारी दिलीप कुमार पांडेय ने दी।