देवघर (शहर परिक्रमा)

देवघर सेंट्रल स्कूल में ‘अंतर्राष्ट्रीय महिला वैज्ञानिक दिवस’ का आयोजन

देवघर: आज का युग वैज्ञानिक युग है। विज्ञान के बिना आज मानव अपने अस्तित्व को सोच भी नहीं सकता। विज्ञान की प्रासंगिकता बढ़ाने में महिलाएं भी पुरुषों के मामले कतई पीछे नहीं है। पारिवारिक जिम्मेदारियां का निर्वहन करते हुए महिलाएं आगे बढ़ी हैं और विज्ञान के क्षेत्र में अपना अहम योगदान दिया है। वैसे तो वैश्विक एवं भारतीय स्तर पर और अनगिनत महिलाओं ने अपनी प्रतिभा से विज्ञान को उन्नत बनाया है और सर्वसुलभ बनाया है पर कुछ की चर्चा तो हमें अवश्य करनी चाहिए। मैडम क्यूरी को कौन नहीं जानता यह पहली महिला थी जिन्होंने विज्ञान को की दो शाखाओं में उत्कृष्ट कार्य के लिए दो बार नोबेल पुरस्कार अपने नाम किया था। कल्पना चावला, सुनीता विलियम्स ने अंतरिक्ष की सीमा में जाकर कई शोध किए हैं। मैडम क्यूरी की दो बेटियों ने भी विज्ञान को समृद्ध किया और 1935 एवं 1965 में नोबेल पुरस्कार अपने नाम किया। हां दूसरी ने शांति के क्षेत्र में नोबेल पाया था। भारतीय महिला वैज्ञानिक अन्नामनी ने सी बी रमन के साथ काम किया और वायुमंडलीय भौतिक और उपकरण के क्षेत्र में अपना योगदान दिया। लेस्ली थॉमस जिन्हें अग्निपुत्री के नाम से जाना जाता है उन्होंने अग्नि पांच के निर्माण में अपना अहम योगदान दिया है।
      उपरोक्त बातें स्थानीय देवघर सेंट्रल स्कूल के प्रशाल में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय महिला वैज्ञानिक दिवस पर आयोजित कार्यशाला में प्राचार्य  ने कहीं।

  मौके पर पलक प्रिया ने कहा यह दिन हम बच्चियों के लिए उत्साहवर्धक है हमारे महिला वैज्ञानिकों की उपलब्धियां हमें इस क्षेत्र में आने को प्रेरित करती है। फातिमा ने कहा हम बच्चियां किसी भी मामले में किसी से कम नहीं है। कल हमारा है और हम भी कुछ कर दिखाएंगे। आरोही ने कहा विज्ञान का विस्तृत आकाश हमे सदा अपनी ओर आकर्षित करता है। हम भी इसकी सीमा मापने अवश्य निकलेंगे। नंदनी ने कहा विज्ञान की चुनौती हमें स्वीकार है इससे हम हर संभव जूझेंगे।