देवघर (शहर परिक्रमा)

देवघर: महाशिवरात्रि उत्सव आज

आज महाशिवरात्रि है। यह उत्सव भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन तथा विवाह का पवित्र उत्सव है। यह उत्सव फाल्गुन कृष्ण चतुदशी (फरवरी-मार्च) को मनाया जाता है। इस दिन सभी शिव भक्त निर्जला उपवास, रातभर जागकर पूजा और शिवलिंग पर जलाभिषेक व बेलपत्र अर्पित कर अंधकार पर विजय का संकल्प लेते हैं। यह दिन शिव-पार्वती विवाह का प्रतीक है। मान्यता के अनुसार इसी रात भगवान शिव निराकार से साकार रूप (ज्योतिलिंग) में पहली बार प्रकट हुए और उन्होंने तांडव नृत्य किया था। पौराणिक कथा के अनुसार, इस दिन शिव जी ‘हलाहल’ विष पीकर नीलकंठ बने और सारी सृष्टि को बचाया।

    महाशिवरात्रि, जिसे ” शिव की महान रात्रि ” कहा जाता है भारत भर में अत्यधिक उत्साह के साथ मनाया जाने वाला एक पवित्र त्योहार है। इसी क्रम में झारखंड के देवधर में इसका उत्सव एक विशेष और दिव्य रूप ले लेता है। बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक, बैद्यनाथ ज्यातिर्लिंग का निवास स्थान होने का कारण देवधर एक आध्यात्मिक केन्द्र बन जाता है, जहाँ लाखों श्रद्धालु शिव और शक्ति के दिव्य मिलन का उत्सव मनाने के लिए एकत्रित होते हैं।
    देवघर को “बाबाधाम” या “बैद्यनाथ धाम” भी कहा जाता है। यह विश्वास है कि भगवान यहाँ बैद्यनाथ के रूप में निवास करते हैं, जो रोग के नाशक और रक्षक हैं। “किवदन्ती के अनुसार, रावण ने यहाँ भगवान शिव की पूजा की थी और जिस लिंग की स्थापना उसने की थी, वह “कामना लिंग” के नाम से प्रसिद्ध हुआ, जो भक्तों की सभी इच्छाओं को पूर्ण करता है। महाशिवरात्रि के दिन इस स्थान का आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि माना जाता है कि इस रात सच्ची पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
     देवघर में महाशिवरात्रि कई दिनों तक चलने वाला एक भव्य उत्सव है। इसमें कठोर भक्ति देखी जाती है। श्रद्धालु, कई दिन पहले से ही यहाँ पहुँचने लगते हैं और भगवान के दर्शन के लिए लंबी कतारों में खड़े रहते हैं। इस उत्सव की एक विशेष परम्परा ‘चतुर्थ प्रहर पूजा’ है जो शिवरात्रि की रात चार चरणों (प्रहरों) में होती है। इस दौरान ज्योतिर्लिंग को पवित्र जल, दूध, शब्द और दही से स्नान कराया जाता है और बिल्व पत्र चढ़ाए जाते हैं। देवघर की एक अनूठी परंपरा “मोर मुकुट” चढ़ाने की है, जो केवल इसी दिन शिव मंदिर के शीर्ष अर्पित किया जाता है। माना जाता है कि इससे विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती है और व्यक्तिगत जीवन में सुख-समृद्धि आती है। वातावरण “ॐ नम: शिवाय” और “हर हर महादेव” के निरंतर जाप से दिव्य ऊर्जा से भर जाता है।
       देवघर में महाशिवरात्रि का सबसे भव्य आकर्षण शोभा यात्रा है। पूरे शहर को रोशनी से सजाया जाता है और यह दुल्हन की तरह चमकता है, जब बारात शहर की गलियों से गुजरती है तो मानो आकाश लोक ही धरती पर उतर जाता है। लोग शिव और पार्वती के विवाह का उत्सव बड़े आनंद से मनाते हैं।
    देवघर में महाशिवरात्रि का उत्सव केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि आस्था और समुदाय की एक गहरी अनुभूति है। निष्कर्ष रूप में देवघर की शिवरात्रि ‘परम्पराओं, गहरी आस्था की महाशिवरात्रि प्राचीन परम्पराओ और सामूहिक उत्सव का अद्भुत संगम है जो इसे दुनिया के सबसे महत्त्वपूर्ण शैव स्थलों में से एक बनाता है।

-लेखक रजत मुखर्जी