देवघर में वार्ड पार्षद चुनाव पर विवाद: झूठे शपथ पत्र के आरोप में न्यायालय में दायर हुई इलेक्शन पिटीशन
देवघर: नगर निगम क्षेत्र के वार्ड संख्या–05 में हुए वार्ड पार्षद चुनाव को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। वार्ड पार्षद प्रत्याशी रहे आशीष कुमार पंडित ने देवघर न्यायालय में विजेता प्रत्याशी टीप चटर्जी के खिलाफ इलेक्शन पिटीशन दायर की है। यह पिटीशन दिनांक 10 मार्च 2026 को दायर की गई, जिसका पंजीकरण Election Petition (01/2026) के रूप में हुआ है। पिटीशन में आरोप लगाया गया है कि विजेता प्रत्याशी टीप चटर्जी ने नामांकन के समय झूठा शपथ पत्र दाखिल कर चुनाव लड़ा और उसी आधार पर जीत हासिल कर ली।

याचिकाकर्ता आशीष कुमार पंडित, जो वार्ड संख्या–05 से ही वार्ड पार्षद पद के उम्मीदवार थे, ने अपनी याचिका में कहा है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान उन्होंने संबंधित रिटर्निंग ऑफिसर (R.O.) को लिखित रूप से यह सूचना दी थी कि टीप चटर्जी का नाम दो अलग–अलग राज्यों की मतदाता सूची में दर्ज है। चुनावी नियमों के अनुसार किसी भी व्यक्ति का नाम एक से अधिक स्थानों की मतदाता सूची में दर्ज होना नियमों के विरुद्ध है, और यदि ऐसा पाया जाता है तो संबंधित उम्मीदवार का नामांकन रद्द किया जा सकता है।
याचिका में कहा गया है कि टीप चटर्जी का एक मतदाता पहचान पत्र संख्या MB576527170 है, जो देवघर नगर निगम क्षेत्र के वार्ड संख्या–05 के भाग संख्या 5/1 में क्रमांक संख्या 970 पर दर्ज है। इसके अतिरिक्त उनका दूसरा मतदाता पहचान पत्र संख्या YER7761570 है, जो कर्नाटक राज्य के बैंगलोर साउथ विधानसभा क्षेत्र में दर्ज है। यह नाम 176 बैंगलोर साउथ, जिला बैंगलोर अर्बन के भाग संख्या 114 के क्रमांक संख्या 344 में दर्ज बताया गया है।
आरोप है कि जब नामांकन प्रक्रिया चल रही थी, तब इस संबंध में पूरी जानकारी रिटर्निंग ऑफिसर को दी गई थी। इसके बावजूद रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई और टीप चटर्जी का नामांकन स्वीकार कर लिया गया। याचिकाकर्ता का कहना है कि यदि उस समय इस तथ्य की सही जांच की जाती, तो उम्मीदवार का नामांकन निरस्त किया जा सकता था और चुनाव का परिणाम अलग हो सकता था।
इलेक्शन पिटीशन में यह भी कहा गया है कि टीप चटर्जी ने नामांकन के समय प्रपत्र–24 में दिए गए शपथ पत्र के कॉलम संख्या–02 में यह घोषणा की थी कि देवघर जिला के अलावा किसी अन्य स्थान की मतदाता सूची में उनका नाम दर्ज नहीं है। याचिकाकर्ता के अनुसार यह घोषणा पूरी तरह गलत और भ्रामक है। उनका कहना है कि जब उम्मीदवार स्वयं शपथ पत्र में गलत जानकारी देता है तो यह चुनावी नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाता है।

आशीष कुमार पंडित ने अपनी याचिका में यह भी उल्लेख किया है कि इस प्रकार का मामला देवघर जिले में पहले भी सामने आ चुका है। उन्होंने Election Petition संख्या 50/22–23 का उदाहरण देते हुए कहा है कि उस मामले में भी इसी प्रकार की स्थिति उत्पन्न हुई थी, जिसके परिणामस्वरूप देवघर जिला परिषद क्षेत्र संख्या–20 की सदस्यता समाप्त हो गई थी। याचिकाकर्ता का कहना है कि वर्तमान मामले में भी समान परिस्थितियां हैं और यदि न्यायालय में तथ्यों की पुष्टि होती है तो यह मामला भी चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकता है।
याचिका में न्यायालय से मांग की गई है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो चुनाव परिणाम को निरस्त किया जाए। साथ ही चुनावी प्रक्रिया में दी गई कथित गलत जानकारी के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई भी की जाए।
इस मामले के सामने आने के बाद स्थानीय राजनीति में हलचल बढ़ गई है। वार्ड संख्या–05 के मतदाताओं के बीच भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि यदि किसी उम्मीदवार का नाम दो अलग–अलग राज्यों की मतदाता सूची में दर्ज है, तो यह कैसे संभव हुआ और चुनाव प्रक्रिया के दौरान इसकी जांच क्यों नहीं की गई।
वहीं दूसरी ओर कुछ राजनीतिक जानकारों का कहना है कि चुनाव के बाद इस प्रकार की इलेक्शन पिटीशन दायर होना असामान्य नहीं है। कई बार चुनाव में हारने वाले उम्मीदवार न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हैं और चुनाव परिणाम को चुनौती देते हैं। हालांकि अंतिम निर्णय न्यायालय के द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर ही लिया जाता है।
अब यह मामला देवघर न्यायालय के विचाराधीन है। अदालत में सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को अपने–अपने पक्ष में साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। यदि अदालत को यह प्रतीत होता है कि नामांकन के समय गलत जानकारी दी गई थी या चुनावी नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो चुनाव परिणाम को रद्द करने तक का आदेश दिया जा सकता है।
हालांकि टिप चटर्जी का पक्ष लेने के लिए जब उनके मोबाइल पर फोन किया गया तो उन्होंने फोन ही रिसीव नहीं किया। लेकिन, फिलहाल इस मामले ने देवघर की स्थानीय राजनीति को गर्मा दिया है। आने वाले दिनों में अदालत की सुनवाई और उसके बाद आने वाले फैसले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यदि याचिकाकर्ता के आरोप साबित होते हैं तो यह मामला न केवल वार्ड संख्या–05 बल्कि पूरे जिले की चुनावी प्रक्रिया के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है। वहीं यदि आरोप सिद्ध नहीं होते हैं तो यह मामला केवल चुनावी विवाद तक सीमित रह जाएगा।
अब देखना होगा कि अदालत इस मामले में क्या रुख अपनाती है और चुनाव से जुड़े इस विवाद का अंतिम निष्कर्ष क्या निकलता है। फिलहाल वार्ड संख्या–05 के मतदाता और स्थानीय राजनीतिक कार्यकर्ता न्यायालय के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं।

