देवघर (शहर परिक्रमा)

दो बाल श्रमिकों को मुक्त कराया गया

देवघर: आज दिनांक 11.04.2026 को बाल श्रम उन्मूलन अभियान के तहत गठित धावा-दल के द्वारा एनसीपीसीआर के दिशा निदेश पर ठाढीलपरा, थाना- सोनारायठाढी में निरीक्षण किया गया, जिसमें  एक ढाबा में कुल दो बाल श्रमिकों को मुक्त कराया गया। सभी दो बाल श्रमिकों को बाल कल्याण समिति देवघर को सुपुर्द कर दिया गया।

माननीय सर्वोच्च न्यायालय नई दिल्ली द्वारा एम. सी. मेहता बनाम् राज्य सरकार एवं अन्य के मामले संबंधी पीटीशन (सी) संख्या 455/1996 में 10.12.1996 को दिए गए निर्णय के आलोक में जिला बाल एवं किशोर श्रमिक कोष में रू 20,000.00 से 50000.00 तक रकम जमा कराया जा सकता है। साथ ही बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं उन्मुलन) अधिनियम, 1986 एवं संशोधित अधिनियम, 2016 की धारा-3 या धारा-3A के उल्लघंन के आधार पर धारा-14 के अनुसार नियोक्ता पर प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई की जा सकती है। विदित हो कि बाल श्रमिकों से कार्य कराना संज्ञेय अपराध है, जिसमें 20000 से 50,000 रुपये तक जुर्माना अथवा 06 माह से 02 वर्ष तक का कारावास या दोनो हो सकता है।
    धावा-दल में श्रम प्रर्वतन पदाधिकारी, सारवां राजेश यादव के अतिरिक्त प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, सोनारायठाढ़ी, थाना प्रभारी सोनारायठाढ़ी, श्रम प्रर्वतन पदाधिकारी, देवघर भूषण यादव, सीडब्ल्यूसी चेयर पर्सन मनोरमा सिंह, चाईल्ड हेल्पलाईन को-ऑर्डिनेटर अनिल पासवान, चाईल्ड हेल्पलाईन सुपरवाईजर प्रवेज अंसारी, चाईल्ड हेल्पलाईन केस वर्कर निरज कुमार दास, NGO आश्रय से दीपा कुमारी एवं आदर्श कुमार, NGO चेतना विकास से पुनम कुमारी एवं अन्य शामिल थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *