देवघर (शहर परिक्रमा)

प्रगतिशील लेखक संघ के स्थापना दिवस पर कवि गोष्ठी का आयोजन

देवघर: आज रविवार को विश्वेसरैया कालोनी, बरमसिया स्थित एल्बट्रोस स्कूल परिसर में प्रगतिशील लेखक संघ के तत्वाधान में कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह आयोजन प्रगतिशील लेखक संघ की स्थापना दिवस के अवसर पर किया गया।

  गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्रगतिशील लेखक संघ के अध्यक्ष प्रो रामनंदन सिंह ने कहा कि विश्व बहुत ही नाजुक दौर से गुजर रहा है और तानाशाह की डगर पर कुछ देश के सुप्रीम पदधारी चल रहे हैं, जो मानवता के लिए खतरा है। गोष्ठी की शुरुआत धीरेंद्र छतरहारवाला की अंगिका कविता- जियेल दे भाई जियेल दे, तोहें खाय छीं खोआ- पेड़ा… सुनाया जबकि रचना झा ने- आंचल की हवा जब छूकर गुजरती है… कविता सुनाई. इसके बाद प्रकाश चंद्र चौहान सामाजिक समरसता पर आधारित कविता सुनायी और बबन बदिया ने अंतिम संस्कार शीर्षक पर आधारित कविता पाठ कर वर्तमान दाह संस्कार के संदर्भ में कटाक्ष किया। मंच संचालन करते हुए खोरठा भाषा के कवि-फाल्गुनी मरीक कुशवाहा ने -बम गिरलो विदेसम..दाम बढ़लो हमर देसम…..सुनायी, जबकि डॉ प्रदीप‌ कुमार  सिंह देव ने- गरीबी एक पीड़ा है कविता सुनाई। जाने माने गीतकार सर्वेश्वर दत्त द्वारी ने- मधुर गीत वाला नव बिहान हो, सहलाते रहना हर पल को.. सुन कर खूब तालियां बटोरी। जलेश्वर ठाकुर शौकीन हिंदी और इंग्लिश की मिश्रित कविता पाठ की, जबकि डॉ शिप्रा झा ने मधुर गीत गाकर श्रोताओं को खूब मनोरंजित की। गोष्ठी में कपिल देव राणा ने मौलिक समस्याओं पर आधारित कविता पाठ की और पुनीत दुबे ने- संगति अच्छी हो..  कविता सुनाई। स्कूल की डायरेक्टर तृषा ने बहुत ही अच्छी कविताएं सुनाई और सब का मन मनोरंजित कर डाली। इसके अलावा काजल कांति सिकदार, अवधेश कुमार सिंह, अंजलि, कुमारी श्री, गणेश प्रसाद उमर आदि ने कविता पाठ की।
    इसके पूर्व आगत अतिथियों का स्वागत स्कूल के प्रबंधक इंद्रदेव सिंह ने किया, जबकि मुख्य अतिथि के तौर पर सर्वेश्वर दत्त द्वारी मौजूद थे। गोष्ठी में सियाराम गिरी समेत कई सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई। समारोह के अंत में कवियों को स्कूल प्रबंधन की ओर से सम्मानित किया गया।

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