देवघर सेंट्रल स्कूल में मातृ दिवस की पूर्व संध्या पर कार्यक्रम आयोजित
देवघर: मातृ दिवस की पूर्व संध्या पर स्थानीय देवघर सेंट्रल स्कूल परिसर में भावपूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए विद्यालय के प्राचार्य सुबोध झा ने कहा कि “पुत्र कुपुत्र हो सकता है, पर माता कभी भी कुमाता नहीं हो सकती।” आदि गुरु आदि गुरु शंकराचार्य की इन पंक्तियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने मातृशक्ति की महिमा का वर्णन किया।

प्राचार्य सुबोध झा ने कहा कि हमारे धर्मग्रंथों में मां को देवतुल्य एवं पूजनीय माना गया है। इतिहास में अनेक उदाहरण मिलते हैं, जहां मां ने अपनी संतान के लिए सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि मां के ममतामयी आंचल की छांव में ही मानव, मानव बन पाता है तथा मां की महिमा को किसी एक दिन में समेटा नहीं जा सकता। उन्होंने उपस्थित सभी मातृदेवियों के प्रति श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए मातृ दिवस की शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत विघ्नहर्ता प्रथम पूज्य भगवान गणपति की वंदना से हुई। इसके बाद बच्चों ने स्वागत गान प्रस्तुत कर उपस्थित मातृशक्ति का अभिनंदन किया। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत नृत्य-नाटिका ने मातृत्व की महिमा का भावपूर्ण चित्रण किया।
इस अवसर पर छात्रा श्रद्धा कुमारी ने संस्कृत भाषा में मातृमहिमा पर प्रभावशाली भाषण प्रस्तुत किया। विभिन्न कक्षाओं के विद्यार्थियों ने नृत्य एवं संगीत के माध्यम से मां के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बच्चों की माताएं उपस्थित रहीं, जिनका उनके नौनिहालों ने ग्रीटिंग कार्ड देकर सम्मान किया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में सोनम, सृज, तबस्सुम, सुमैया, जोया, जिया एवं पीयूष का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम की जानकारी विद्यालय के मीडिया प्रभारी दिलीप कुमार पांडेय ने दी।

