देवघर (शहर परिक्रमा)सिनेमा जगत

भारतीय सिनेमा के प्रशंसक प्रमोद बाजला

भारतीय सिनेमा का इतिहास बहुत ही समृद्ध रहा है। जहाँ दादा साहेब फाल्के से लेकर राज कपूर, दिलीप कुमार, अमिताभ, मिथुन जैसे कलाकार अपनी कलाकारी से दर्शकों का मोहते रहे।
       कहते हैं कि अर्जुन की तबतक कोई कद्र नहीं जबतक उनके सारथी कृष्ण न हों। वैसे ही, कलाकारों की तबतक कोई कीमत नहीं होती जब तक उनके क़द्रदान ही न हों। भारतीय सिनेमा अपने इन्हीं क़द्रदानों की बदौलत अपनी बुलंदियां छूता रहा। सिनेमा के इन्हीं क़द्रदानों में एक हैं देवघर के प्रसिद्ध व्यवसाई प्रमोद बाजला।


   प्रमोद बाजला देवघर के प्रतिष्ठित व्यवसायीक घराना बाजला परिवार से हैं। 72 वर्षीय प्रमोद बाजला देवघर सदर अस्पताल के निकट सैनिटरी वेयर स्टोर की ‘बाजला सेल्स कारपोरेशन’ नामक प्रतिष्ठान का संचालन करते हैं।

अभिनेता कुमार गौरव के साथ प्रमोद बाजला


        बात उन दिनों की है जब सिनेमा मनोरंजन का एकमात्र साधन हुआ करती थी और युवामन प्रमोद बाजला पर इसका व्यापक असर था। चोरी छुपे अपने नायकों की फ़िल्में देखना इनके आदतों में शुमार था।
    उस दौर में प्रमोद बाजला ने अपने हीरो (अभिनेता) से जुड़ने का एक नायाब तरीका ढूंढ़ निकाला और उस समय की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘माधुरी’ से अभिनेताओं के पत्राचार का पता लेकर उन्हें चिट्ठी लिखने लगे।

पहली चिट्ठी लिखने के लगभग एक महीने बाद उसका जवाब भी आ गया जिसने प्रमोद के लिए संजीवनी का काम किया। नतीजतन उन्होंने लगातार चिट्ठी लिखना शुरू कर दिया और उसके जवाब भी आने लगे।
     प्रमोद बाजला बताते हैं कि आज उनके पास रामानंद सागर, हेमा मालिनी, मो. रफी, प्राण, लक्ष्मीकांत प्यारे लाल, शशि कपूर, डेजी इरानी, हनी इरानी, नंदा, जानी वॉकर, जय ललिता, प्रेम धवन सहित 30-35 चिट्ठीयों का संग्रह है जो अभिनेताओं ने वापस उन्हें लिखा था।

चरित्र अभिनेता प्राण द्वारा प्रमोद बाजला को लिखी चिट्ठी


   1969-70 के दौर में मैं सिनेमा और उसके कलाकारों का बहुत बड़ा प्रशंसक रहा। यही कारण रहा कि अमिताभ बच्चन, मुकेश, नितिन मुकेश जैसे कलाकारों को देखने/सुनने मैं कोलकाता तक चला जाता था। हालांकि मैं मुकेश का बहुत बड़ा फैन रहा लेकिन और भी कई कलाकार कम नहीं थे। बस यूँ कह लीजिये कि कलाकार और उनके प्रशंसकों के बीच जो भावनात्मक और गहरा सम्बन्ध होता है वही हमारे बीच भी हमेशा से रहा।