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1 जुलाई: राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस

राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस पृथ्वी पर मानवों का भगवान कहे जाने वाले चिकित्सकों को समर्पित है। अलग-अलग देशों में यह दिवस भिन्न-भिन्न तिथियों पर मनाया जाता है। भारत में ‘चिकित्सक दिवस’ प्रतिवर्ष 1 जुलाई को मनाया जाता है।

1 जुलाई को देश के प्रख्यात चिकित्सक, स्वतंत्रता सेनानी और समाज सेवी डॉ. बिधान चन्द्र राय का जन्मदिन और पुण्य तिथि दोनों ही हैं। वे ‘भारतीय स्वतंत्रता संग्राम’ के एक अहम सिपाही रहे थे। आज़ादी के बाद उन्होंने अपना सारा जीवन अपने व्यवसाय यानि चिकित्सा सेवा को समर्पित कर दिया। पश्चिम बंगाल में अपने मुख्यमंत्री काल के दौरान उन्होंने कई अहम विकास कार्य किए। अपने अथक प्रयासों और समाज कल्याण के कार्यों के लिए उन्हें 1961 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से भी सम्मानित किया गया था। चिकित्सक धरती पर भगवान का दूसरा रुप होता है। भगवान तो एक बार जीवन देता है, किंतु डॉक्टर हमारी अमूल्य जान को बार-बार बचाता है। दुनिया में ऐसे कई उदाहरण हैं, जहाँ डॉक्टरों ने भगवान से भी बढ़कर काम किया है। बच्चे को जन्म देना हो या किसी वृद्ध को बचाना हो, चिकित्सक की मदद हमेशा मुसीबतों से मानव को बचाती है। यही एक ऐसा पेशा है, जहाँ दवा और दुआ का अनोखा संगम देखने को मिलता है, इंसान को भगवान भी यहीं बनाया जाता है। चिकित्सकों ने मानव जाति के लिए बहुत समर्पण किया है। यदि भारत की बात की जाए तो देखेंगे कि यहाँ आज भी चिकित्सकों और वैद्यों का विशेष आदर-सत्कार किया जाता है। आधुनिक युग में तो चिकित्सकों की मांग और भी बढ़ गई है। चिकित्सक के इसी समर्पण और त्याग को याद करते हुए 1 जुलाई का दिन भारत में ‘राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। चिकित्सक दिवस मनाने का सबसे बड़ा महत्त्व यह है कि सभी चिकित्सक अपनी ज़िम्मेदारियों को समझें और लोगों के स्वास्थ्य से सम्बन्धित दु:ख, तकलीफ और रोग आदि के प्रति सजग रहें।

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लेखक डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव