देवघर (शहर परिक्रमा)

मानव दुर्व्यापार विरोधी दिवस: बाल तस्करी पर लगाम लगाने हेतु एकजुट होने पर जोर

देवघर: विकास भवन में आयोजित मानव दुर्व्यापार विरोधी दिवस के अवसर पर जिला समाज कल्याण विभाग, चेतना विकास एवं आश्रय की पहल पर एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया। बैठक के दौरान जिला प्रशासन, विधिक संस्थाएं, पुलिस, स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग सहित बच्चों से जुड़े सभी प्रमुख विभागों और अधिकारियों ने एक सुर में कहा कि बाल तस्करी पर लगाम लगाने के लिए एकजुट और समन्वित कार्रवाई की जरूरत है।
इस अवसर पर शामिल अधिकारियों में जिला समाज कल्याण विभाग, बाल कल्याण समिति, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, चिकित्सा पदाधिकारी, पुलिस उपाधीक्षक (साइबर), शिक्षा व कल्याण विभाग, रेलवे सुरक्षा बल, महिला थाना, चाइल्ड हेल्पलाइन और अन्य विभागों के प्रतिनिधि शामिल थे।
गौरतलब है कि चेतना विकास एवं आश्रय, देशव्यापी नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (JRC) का सहयोगी संगठन है।

बैठक में बच्चों की तस्करी से निपटने में आने वाली चुनौतियों पर खुलकर चर्चा हुई। अधिकारियों ने माना कि:-
👉कानूनों की जागरूकता को बढ़ाना जरूरी है साथ ही संवेदनशील समुदायों को सतर्क करना होगा।
👉पंचायती राज पदाधिकारी रणवीर सिंह ने कहा कि चेतना का विकास और चैतन्य लोगों की पहल से ही मानव दुर्व्यवहार को समाप्त किया जा सकता है।
👉 डालसा के सचिव संदिप निषित बारा ने कहा कि सामुहिक प्रयास हीं बच्चों के खिलाफ हो रहे दुर्व्यवहार को रोक सकता है।
👉ए.सी.एम.ओ. डॉ बच्चा प्रसाद सिंह ने कहा कि सर्वाइवर की मानसिक परिस्थितियों को समझते हुए कार्य करना बहुत जरूरी है।
👉चेतना विकास की निदेशिका रानी कुमारी ने कहा कि जब तक ट्रैफिकिंग करने वालों को शीघ्र और सख्त सजा नहीं मिलेगी, तब तक कानून का डर नहीं बनेगा. बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक तालमेल और समयबद्ध कानूनी कार्रवाई सबसे जरूरी है।
जानकारी हो कि जुलाई माह में चेतना विकास ने आश्रय, चाइल्ड लाइन, RPF के साथ मिलकर रेलवे स्टेशनों पर जागरूकता अभियान चलाया, क्योंकि बाल तस्करी के मामलों में रेलवे नेटवर्क का दुरुपयोग सबसे अधिक होता है।

इस अभियान का उद्देश्य यात्रियों, रेल कर्मियों और दुकानदारों को बाल तस्करी के संकेत पहचानने और कार्रवाई के लिए प्रेरित करना था।
कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि बाल तस्करी केवल बाल मजदूरी या यौन शोषण तक सीमित नहीं है। कई बच्चियों को जबरन विवाह के लिए भी तस्करी का शिकार बनाया जाता है – यह एक छिपी हुई लेकिन गंभीर समस्या है।
इस अवसर पर सभी हितधारकों ने संकल्प लिया कि वे मिलकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे और देवघर को बाल तस्करी मुक्त जिला बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे।