पश्चिम बंगाल के बासुदेब कामाल्या एवं झारखण्ड के सुबोध झा को ‘डॉ. नीलाचला साहू स्मृति पुरस्कार’ देने की घोषणा
देवघर: स्थानीय साइंस एंड मैथमेटिक्स डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन तथा राजगंगपुर, ओड़िशा स्थित नीलाचला फाउंडेशन के युग्म बैनर तले पश्चिम बंगाल स्थित सुंदरवन में आगामी 21, 22 एवं 23 नवंबर को आयोजित होने वाले 12वीँ अंतर्राष्ट्रीय सम्मान समारोह में मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल स्थित असन्दा शिक्षा निकेतन के विज्ञान शिक्षक बासुदेब कामाल्या एवं देवघर, झारखण्ड स्थित देवघर सेंट्रल स्कूल के प्राचार्य सह साइंस फॉर सोसाइटी, देवघर के सचिव सुबोध झा को ‘डॉ. नीलाचला साहू स्मृति पुरस्कार’ देने की घोषणा की गई।

दोनों विज्ञान के क्षेत्र में वर्षो से सेवा देते आ रहे हैं। दोनों विज्ञानविदों ने कई राष्ट्रीय विज्ञान संगोष्ठी में अपनी अपनी भागीदारी निभाते आ रहे हैं। ज्ञात हो कि डॉ. नीलाचल साहू रिफ्रैक्टरी और सिरेमिक के क्षेत्र में एक अंतरराष्ट्रीय हस्ती थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन रिफ्रैक्टरी, सिरेमिक और संबंधित सामग्रियों पर अनुसंधान और विकास के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने त्रिशूल, पृथ्वी और नाग मिसाइलों के लिए सिरेमिक रेडोम के विकास के लिए डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के साथ मिलकर काम किया, जो उस समय (1985-1988) हैदराबाद स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला के निदेशक थे। डॉ. साहू मेसर्स ओसीएल इंडिया लिमिटेड, राजगांगपुर, ओडिशा के रिफ्रैक्टरी प्रभाग में प्रौद्योगिकी और अनुसंधान एवं विकास प्रमुख थे। वे जून 2011 से जुलाई 2016 तक डालमिया वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान संस्थान के निदेशक रहे। उस दौरान माननीय पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने इस संस्थान का दौरा किया था। डॉ. एन. साहू ने 45 रिफ्रैक्टरी उत्पाद और प्रक्रियाएँ विकसित की हैं जिनका व्यावसायीकरण किया जा चुका है और जिनमें से 27 का पेटेंट कराया जा चूका है।

