डीएवी कोडरमा में मनाई गई शिक्षाविद् महात्मा नारायण दास ग्रोवर की जयंती
कोडरमा: पीवीएसएस डीएवी पब्लिक स्कूल, झुमरी तिलैया में कर्मयोगी शिक्षाविद् महात्मा नारायण दास ग्रोवर जी की जयंती उत्साहपूर्वक एवं श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर विद्यालय में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्राचार्य एवं सभी शिक्षकों द्वारा महात्मा ग्रोवर जी की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इसके पश्चात कक्षा आठवीं की छात्रा सभ्यता सिंह ने अपने प्रभावी अंग्रेजी भाषण के माध्यम से महात्मा ग्रोवर जी के कर्मशील एवं प्रेरक जीवन पर प्रकाश डाला।

अपने हिंदी भाषण में ईशु ने ‘झोले वाले बाबा’ की सादगी, कर्मठता एवं सेवा-भाव को भावपूर्ण शब्दों में प्रस्तुत किया। मधुर कंठ से कुमुद सिंह ने महात्मा ग्रोवर जी के जीवन और कार्यों को सरसता से संजोया।
कक्षा छठी की छात्रा निशा गुप्ता ने महात्मा नारायण दास ग्रोवर की सादगी, सत्य एवं निष्ठा को कवितामय अभिव्यक्ति दी। उनके जीवन-चरित्र पर आधारित प्रश्नोत्तरी का सफल संचालन लक्ष्मी द्वारा किया गया। विद्यार्थियों ने लघु नाटिका के माध्यम से महात्मा ग्रोवर जी के कर्मयोग और मानव सेवा के विशेष जुड़ाव को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संयोजन एवं मंच संचालन कक्षा आठवीं की छात्रा आराध्या सिंह ने कुशलता से किया।
विद्यालय के प्राचार्य कृष्ण कुमार सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि महात्मा नारायण दास ग्रोवर जी अद्भुत, विलक्षण एवं प्रतिभासंपन्न व्यक्तित्व थे। उनके अकेले अथक प्रयासों से सम्मिलित बिहार-झारखंड में सैकड़ों संस्थान स्थापित हुए, जो आज भी उत्कृष्टता के नए आयाम स्थापित कर रहे हैं। वे डीएवी पब्लिक स्कूल, पटना प्रक्षेत्र के क्षेत्रीय निदेशक तथा डीएवी कॉलेज मैनेजिंग कमेटी, नई दिल्ली के उपाध्यक्ष रहे।
उन्होंने आगे बताया कि महात्मा ग्रोवर जी द्वारा प्रारंभ किए गए डीएवी संकल्प, संकल्प सर्व शिक्षा, तथा संकल्प नेत्र ज्योति कार्यक्रमों के माध्यम से हजारों उपेक्षित, जनजातीय, गरीब एवं बेसहारा बच्चों को शिक्षा एवं सहयोग प्रदान किया जा रहा है।
साथ ही दयानंद नेत्रालय, खूंटी में 1983 से अब तक 40,000 से अधिक मोतियाबिंद ऑपरेशन निःशुल्क किए जा चुके हैं तथा लाखों रोगियों को निःशुल्क चिकित्सा उपलब्ध कराई गई है।
प्राचार्य ने कहा कि महात्मा ग्रोवर जी का जीवन-दर्शन हम सबके लिए अनुकरणीय है। हमें उनके त्याग, समर्पण और तपस्या से प्रेरणा लेनी चाहिए।
उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान देने वाले वरिष्ठ शिक्षक कुमार सतीश सिंह, दिनेश कुमार दुबे, मुकेश कुमारी, मिथिलेश झा, ज्योति एवं निशु कुमारी की सराहना की।

