जन्म–मृत्यु पंजीकरण से संबंधित एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन
देवघर नगर निगम के सभागार में नगर आयुक्त सह प्रशासक की अध्यक्षता में नगर निगम क्षेत्र अंतर्गत जीवनांक (जन्म–मृत्यु) पंजीकरण से संबंधित एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण के दौरान जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप घटनाओं की समयबद्ध रिपोर्टिंग को लेकर विस्तृत जानकारी दी गई तथा निजी संस्थानों द्वारा रिपोर्टिंग में आ रही व्यावहारिक समस्याओं का समाधान किया गया।

नगर आयुक्त ने अपने संबोधन में कहा कि जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र का उपयोग शिक्षा, पहचान, सरकारी योजनाओं सहित अनेक महत्वपूर्ण कार्यों में होता है, इसलिए प्रमाण पत्र निर्गत करने में विशेष सतर्कता एवं गंभीरता बरती जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि निजी संस्थानों द्वारा रिपोर्टिंग में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और यह भी सुनिश्चित किया जाए कि आम नागरिकों को किसी तरह की असुविधा न हो।
प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि निजी संस्थानों द्वारा जन्म एवं मृत्यु की घटनाओं की सूचना 21 दिनों के भीतर नगर निगम के निबंधक को देना अनिवार्य है। 21 से 30 दिनों के बाद की गई रिपोर्ट पर विलंब शुल्क के साथ निबंधन किया जाता है, जबकि 30 दिनों से एक वर्ष से कम अवधि के मामलों में सांख्यिकी पदाधिकारी की स्वीकृति के पश्चात निबंधन का प्रावधान है। एक वर्ष से अधिक पुराने मामलों में अनुमंडल पदाधिकारी या उनके द्वारा नामित कार्यपालक दंडाधिकारी की स्वीकृति के बाद ही निबंधन किया जाता है।
सहायक नगर आयुक्त सह रजिस्ट्रार (जन्म–मृत्यु), देवघर नगर निगम ने जानकारी दी कि बच्चों का बिना नाम के भी 12 माह तक निःशुल्क पंजीकरण किया जाता है तथा बाद में नगर निगम कार्यालय में आवेदन देकर बच्चे का नाम जोड़ा जा सकता है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि किसी भी प्रकार के फर्जीवाड़े से बचें, ताकि भविष्य में बच्चों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। उन्होंने यह भी बताया कि 21 दिनों के भीतर आवेदन जमा करने पर किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता है। प्रशिक्षण में सांख्यिकी कार्यालय से आए सहायक सांख्यिकी पदाधिकारी श्री कमलेश कुमार एवं श्री अरविंद कुमार द्वारा भी विषय की बारीकियों पर विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम में नगर निगम के कर्मी एवं निजी संस्थानों से आए प्रतिनिधि उपस्थित थे।

