अपराधियों को सजा दिलाने में ‘वैज्ञानिक साक्ष्य’ सहारा बनेगा, देवघर पुलिस हो रही अपग्रेड
वैज्ञानिक साक्ष्य को लेकर दो दिवसीय कार्यशाला शुरू
देवघर: केसों के वैज्ञानिक अनुसंधान को लेकर पुलिस लाइन में बुधवार से दो दिवसीय कार्यशाला शुरू हुआ। इसमें सभी एसडीपीओ, डीएसपी, इंस्पेक्टर, थानेदार और हर थाने से चयनित पुलिस पदाधिकारी भाग ले रहे हैं।

एसपी सौरभ ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य केसों के आरोपियों को कोर्ट से सजा दिलाना है। इसके लिए कैसे केसों का गुणवत्ता पूर्ण अनुसंधान हो, इसके गुर पुलिस पदाधिकारियों को सिखाए जा रहे हैं। राज्य विधि-विधान प्रयोगशाला (एफएसएल), रांची से दो साइंटिस्टों को कार्यशाला में बुलाया गया है, जो पुलिस पदाधिकारियों को वारदात के बाद घटनास्थल से सबूतों को कैसे वैज्ञानिक तरीके से इकट्ठा करेंगे, इसके बारे में बताएंगे, ताकि अपराधियों को सजा दिलाने में मदद मिल सके।

नए कानून में कई चीजें बदली है और साइंटिफिक एवीडेंस को लेकर कई कार्य अब करने हैं, उन सारी चीजों को लेकर पुलिस पदाधिकारियों का संवेदीकरण भी किया जा रहा है। अनुसंधान की गुणवत्ता को बढ़ाना देवघर पुलिस का उद्देश्य है, ताकि कन्विक्शन (कोर्ट द्वारा दी जाने वाली सजा) रेट बढ़ सके। जब सब-इंस्पेक्टर बहाल होते हैं तो उन्हें बेसिक ट्रेनिंग रहती है। लेकिन जब वे फील्ड में आते हैं तो उसकी अलग चुनौतियां होती है। ऐसे कार्यशाला का उद्देश्य जानकारी को अपडेट करना है, ताकि फिल्ड में उसे लागू किया जा सके, जिससे निश्चय ही कन्विक्शन रेट बढ़ेगा।
अब हर थाने में रहेगी अनुसंधान टीम
एसपी ने बताया कि अब जिले के हर थाने में तीन पुलिसकर्मी साइंटिफिक एवीडेंस जुटाने के लिए घटनास्थल पर जाएंगे। इसके लिए हर थाने से एक एसआई, एक एएसआई और एक कांस्टेबल का चयन किया गया है, जो कार्यशाला में वैज्ञानिक अनुसंधान के गुर सीख रहे हैं। किसी भी थाना क्षेत्र में कोई घटना घटती है तो संबंधित थाने की अनुसंधान टीम घटनास्थल पर जाएगी और साइंटिफिक एवीडेंस जुटाएगी, ताकि कोर्ट में ट्रायल के दौरान इन सबूतों के आधार पर आरोपियों को सजा दिलाई जा सके। एसपी ने बताया कि जिले में सर्वाधिक होने वाले काडों पर हमलोगों का ज्यादा फोकस है। पुलिस पदाधिकारी ऐसे कांडों से संबंधित अपने डाउट को क्लियर कर सकेंगे, इसके लिए कार्यशाला में अलग से सत्र भी रखा गया है।
रांची एफएसएल में 14 शाखाएं कार्यरत
रांची के स्टेट फोरेंसिक साइंट लेबोरेटरी से आए साइंटिस्टों ने पुलिस पदाधिकारियों को बताया कि किसी भी क्राइम सीन पर एसओपी का पालन करते हुए कैसे साइंटिफिक एवीडेंस को कलेक्ट करना है और उसे जांच में कैसे एफएसएल भेजना है, इसकी बारिकियों को बताया। रांची एफएसएल में 14 शाखाएं हैं, जिसमें बॉयोलॉजी डिवीजन, सेरोलॉजी, डीएनए, टॉक्सिकोलॉजी, एनडीपीएस, डॉक्यूमेंट, लाई डिटेक्टर, साइबर फोरेंसिक, फोरेंसिक इंजीनियरिंग, फोरेंसिक बैलिस्टिक, एक्सप्लोसिव, फिंगरप्रिंट डिवीजन आदि शामिल हैं।

