मनरेगा से महात्मा गाँधी के नाम हटाने को लेकर कांग्रेस का धरना प्रदर्शन
देवघर: आज 22 दिसंबर को मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) का नाम बदलने के विरोध में देवघर जिला कांग्रेस कमिटी द्वारा जिलाध्यक्ष मुकुन्द दास के नेतृत्व में टावर चौक स्थित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया गया। इस दौरान कांग्रेस नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

मौके पर जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकुन्द दास ने कहा कि मनरेगा का नाम बदलना कानून की आत्मा पर सीधा हमला है। मनरेगा कोई साधारण योजना नहीं, बल्कि संसद द्वारा पारित एक कानूनी अधिकार है। यह महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज, श्रम की गरिमा और आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत की परिकल्पना पर आधारित है। इसका नाम बदलना गांधीजी के योगदान को मिटाने और उनके विचारों का अपमान करने जैसा है।
उन्होंने कहा कि मनरेगा आज देश के हर गांव, हर मजदूर और गरीब की पहचान बन चुका है। नाम बदलने से मजदूरों में भ्रम फैलेगा, जागरूकता घटेगी और अधिकारों की समझ कमजोर होगी। यह सरकार की असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की राजनीति है। सरकार को नाम बदलने के बजाय मजदूरी बढ़ाने, समय पर भुगतान सुनिश्चित करने, 100 दिन से अधिक रोजगार देने और काम की गुणवत्ता सुधारने पर ध्यान देना चाहिए।
मनरेगा में पहले 90% राशि केंद्र देती थी तथा 10% राज्य सरकार को देने का प्रावधान था। लेकिन इस बार केंद्र सिर्फ 60% एवं राज्यांश 40% कर देने से राज्य पर अधिक आर्थिक बोझ पड़ेगा। जबकि जीएसटी एवं सभी कर केंद्र के पास जमा होता है और केंद्र राज्यों को मनमाने ढंग से राशि आबंटित करते है। इस परिस्थिति में राज्य के पास राशि के अभाव रहता है और यह योजना नहीं चल पाएगी।
नाम बदलने से नए बोर्ड, नए कागजात और नए प्रचार पर करोड़ों रुपये खर्च होंगे, जबकि वही पैसा मजदूरों की मजदूरी और रोजगार पर खर्च किया जाना चाहिए। पहले भी कई योजनाओं के नाम बदले गए, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि कोरोना काल में मनरेगा ने करोड़ों परिवारों को जीवनरेखा प्रदान की। यह योजना देश की आवश्यकता है, कोई विवाद नहीं। इसे कमजोर नहीं बल्कि और मजबूत करने की जरूरत है। कांग्रेस की स्पष्ट मांग है कि मनरेगा को यथावत रखा जाए और इसके अधिकारों की रक्षा की जाए।
वहीं धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए जिला 20 सूत्री उपाध्यक्ष डॉ. मुन्नम संजय ने कहा कि केंद्र में भाजपा की नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद से लगातार किसानों एवं मजदूरों के अधिकारों पर हमला किया जा रहा है। यह सरकार केवल नाम बदलने की राजनीति कर रही है। पहले किसान विरोधी तीन काले कानून लाए गए, जिन्हें देशव्यापी विरोध के बाद वापस लेना पड़ा। उसी तरह मनरेगा जैसे मजदूर हितैषी कानून को कमजोर करने के उद्देश्य से उसका नाम बदलने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा लाया गया मनरेगा कानून मजदूरों का कानूनी अधिकार है। इसके आड़ में गोडसेवादी सोच के लोग राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम को हटाने का प्रयास कर रहे हैं, जो देश की जनता कभी बर्दाश्त नहीं करेगी। जब तक केंद्र सरकार यह फैसला वापस नहीं लेती, तब तक कांग्रेस का विरोध सड़क से लेकर सदन तक जारी रहेगा।
धरना-प्रदर्शन में मुख्य रूप से प्रदेश सचिव नागेश्वर सिंह, जिला महासचिव-सह-प्रवक्ता दिनेश कुमार मंडल, जिला महासचिव विवेक मिश्रा, मणिकांत यादव, नगर अध्यक्ष रवि केशरी, जिला पदाधिकारी सौरभ दास, प्रखंड अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ गुलाब यादव, हेमंत चौधरी, नकुल दास, युवा नेता आशिष भारद्वाज, आदर्श केशरी, संजीव यादव, एनएसयूआई शैफ दानिश, पिछड़ा प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष विकास राउत, लालू भोक्ता, विजय वर्मा, बाबा यादव, अजय कुमार पंकज, शंभू पाठक, मिथिलेश कुमार यादव, नूनू खान, पपली खान, नारायण यादव, मो. नौशाद अंसारी, गोपाल राजहंस, सुनील रज्जक, पिंटू यादव, दिवाकर पासवान सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित थे।

