कोडरमा (शहर परिक्रमा)

डीएवी कोडरमा में मनाया गया स्वामी श्रद्धानंद जी का बलिदान दिवस

कोडरमा: डीएवी पब्लिक स्कूल, झुमरी तिलैया के प्रांगण में आज महान समाज सुधारक, स्वतंत्रता सेनानी तथा आर्य समाज के प्रमुख स्तंभ स्वामी श्रद्धानंद जी की पुण्यतिथि को बलिदान दिवस के रूप में श्रद्धा और गरिमा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिवार ने स्वामी जी के महान बलिदान और उनके द्वारा दिखाए गए सत्य, साहस और समाज सुधार के मार्ग को स्मरण किया।

कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के प्राचार्य एवं समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं द्वारा स्वामी श्रद्धानंद जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। इसके पश्चात आयोजित श्रद्धांजलि सभा में विद्यार्थियों ने विविध प्रस्तुतियों के माध्यम से स्वामी जी के जीवन, संघर्ष और योगदान को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
छात्रा आकृति सिंह ने हिंदी में तथा मानवी सिंह ने अंग्रेजी में स्वामी श्रद्धानंद जी के जीवन और उपलब्धियों पर सारगर्भित वक्तव्य दिए। ईशु ने हिंदी कविता और सभ्यता सिंह ने अंग्रेजी कविता के माध्यम से स्वामी जी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। लक्ष्मी ने प्रश्नोत्तरी का कुशल संचालन किया, जबकि वर्षा प्रिया ने स्वामी श्रद्धानंद जी के जीवन से जुड़े प्रमुख तथ्यों को साझा कर विद्यार्थियों के ज्ञान में वृद्धि की।
इस अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए सुंदर और आकर्षक पोस्टरों ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। इन पोस्टरों के माध्यम से स्वामी श्रद्धानंद जी के विचारों और संदेशों को सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का सफल एवं प्रभावशाली मंच संचालन आराध्या सिंह ने अपनी ओजस्वी वाणी से किया।
विद्यालय के प्राचार्य कृष्ण कुमार सिंह ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को स्वामी श्रद्धानंद जी के पदचिह्नों पर चलने और समाज सेवा के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा दी।

उन्होंने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद जी का जीवन हमें निडरता, सत्यनिष्ठा और सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध संघर्ष करने की सीख देता है। स्वामी जी ने शिक्षा, नारी उत्थान, छुआछूत उन्मूलन तथा राष्ट्र जागरण के लिए आजीवन संघर्ष किया। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय की स्थापना कर उन्होंने भारतीय शिक्षा पद्धति को नई दिशा प्रदान की।

प्राचार्य ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे स्वामी श्रद्धानंद जी के विचारों को जन-जन तक पहुँचाने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लें।
कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के शिक्षक सुजीत कुमार राणा, धर्मेंद्र पाठक, निधि अम्बष्ट एवं निशू का विशेष योगदान रहा।