कोठीया जनाकी में मृत्युभोज का बहिष्कार
देवघर: ‘कहते हैं कि मृत्यु भोज शोक को दिखावे में बदल देता है, यह परंपरा संवेदनाओं पर बोझ है।
सादगी और सहानुभूति ही सच्ची श्रद्धांजलि है, भोज नहीं।‘
इसी उक्ति से प्रेरित होकर कुश्मी देवी के मृत्यु उपरान्त इनके पुत्र मुकेश कुमार मंडल ने मृत्युभोज को पाखंड, अंधविश्वास और रुढीवादीता बताते हुए मृत्युभोज का बहिष्कार कर दिया। और समाज के बुजुर्ग और गणमान्यों ने कुश्मी देवी को सिर्फ श्रद्धांजलि दी।

इस दौरान भूतनाथ यादव, अजय यादव चन्द्रमोलेश्वर यादव, धनश्याम यादव, अवधेश यादव, प्रमोद मंडल, अमरनाथ दास, राजकुमार साह, मृत्यूंजय यादव, वसंत आनन्द, महेन्द्र दास, कुंती देवी, शंकर ताँती, नन्दलाल पंडीत, अजय कुमार, संजीव कुशवाहा धन्नजय मंडल इत्यादि कोठीया जनाकी के दर्जनों ग्रामीण उपस्थित थे।
इसके पूर्व मोहनपुर प्रखंड अंतर्गत ग्राम कोठिया जनाकी में समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें मृत्यु के उपरांत दिए जाने वाले मृत्यु भोज की परंपरा पर गंभीर चर्चा की गई। बैठक में उपस्थित समाज के बुजुर्गों, युवाओं एवं गणमान्य नागरिकों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि मृत्यु भोज जैसी कुप्रथा को पूर्ण रूप से बंद किया जाएगा।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि मृत्यु जैसे दुःखद अवसर पर भोज देना आर्थिक और मानसिक रूप से शोकाकुल परिवार पर अनावश्यक बोझ डालता है। समाज में सादगी, संवेदना और सहयोग की भावना को बढ़ावा देने के लिए इस परंपरा को समाप्त करना आवश्यक है। सभी ने यह संकल्प लिया कि भविष्य में कोई भी व्यक्ति मृत्यु भोज का आयोजन नहीं करेगा और समाज के अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करेगा।

