विश्व हिंदी दिवस पर साहित्यिक परिचर्चा ‘बैठकी’ का हुआ आयोजन
देवघर: बेलाबगान स्थित अनिल कुमार झा के आवास पर विश्व हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में साहित्यिक मंच “बैठकी” के तत्वावधान में साहित्यिक परिचर्चा सह काव्य पाठ का आयोजन किया गया। “बैठकी” की बैठक दो सत्रों में डॉ शंकर मोहन झा की अध्यक्षता में संपन्न हुई।

प्रथम सत्र में परिचर्चा का विषय हिंदी पारंपरिक ज्ञान से कृत्रिम मेधा यानी AI तक था। उपस्थित सदस्यों ने इस विषय पर अपने मंतव्य रखे। चर्चा का निचोड़ ये रहा कि AI खुद ही अभी सीख रहा है। AI भले ही कहानियां, कविता, छंद आदि प्रेमचंद, निराला, महादेवी वर्मा, जयशंकर प्रसाद जैसे स्थापित शैली में लिख सकता है। पर वह लेखक की भावना और मौलिकता को उसमें डाल नहीं सकता। AI स्थापित शब्दों को ही दोहराता है एक ही लय में लिखता। जबकि लेखक अपनी खुद की भाषा और अपने गढ़े शब्दों को लिखता है। ये AI नहीं करता है। AI तो पहले से लिखी हुई सामग्रियों की नकल कर सकता है शब्दों के हेर फेर से जिससे रचना मौलिक लगे। परन्तु वह कवि या कहानीकार या किस्सागो की तरह शब्दों का चयन और भावना नहीं डाल सकता ।
द्वितीय सत्र में कवि गोष्ठी का आयोजन हुआ। जिसमें उपस्थित सदस्य कवियों ने अपनी अपनी कविता का पाठ किया। अंत में सर्वेश्वर दत्त द्वारि ने कविता का गायन कर सभा में चार चांद लगा दिया।
अंत में धन्यवाद ज्ञापन कर अनिल कुमार झा ने बैठक विसर्जन किया। इस बैठक में “बैठकी” के सदस्य सोनम झा, प्रशांत कुमार सिन्हा, गणेश प्रसाद उमर, कपिलदेव राणा, उमाशंकर राव”उरेंदु”, शचींद्र नाथ झा, डॉ विजय शंकर, डॉ शंकर मोहन झा, श्रवण सहस्त्रांशु, अनिल कुमार झा, सर्वेश्वर दत्त द्वारी आदि उपस्थित थे।

