स्वामी विवेकानंद हमारे सर्वकालिन आदर्श: सुबोध झा
देवघर सेंट्रल स्कूल में मनाया गया युवा दिवस
भारत वर्ष मनीषियों का देश है। यहाँ समय समय पर महान विभूतियों ने अवतरण लेकर सम्पूर्ण मानवता को जीवन की राह दिखलाया है। 12 जनवरी 1863 को ऐसे ही महान विभूतियों में से एक स्वामी विवेकानंद जी का अवतरण नरेन्द्र नाथ दत्त के रूप मे हुआ। बाल्यकाल से ही उनकी अभिरुचि पाश्चात्य संस्कृति और इतिहास में रही थी। उनके मन मे ईश्वर को देखने की प्रबल इच्छा थी और इसके लिए वे विभिन्न धर्मगुरुओं से मिल कर बात करते और निराश हो जाते थे। इसी क्रम में उनकी मुलाकात रामकृष्ण परमहंस से दक्षिणेश्वर में हुआ और उन्हें अपने गुरु के रूप में वरण किया। उनकी विचार धारा अप देवो भव, दरिद्र देवो भव , मातृ देवो भव, पितृ देवो भव की वकालत करती थी। वेदांत, राजयोग, भक्ति योग उनके विचार धारा के मूल मंत्र है। आइए हम सब मिलकर आधुनिक भारत के महान शिल्पी को आज उनके जन्मदिन पर नमन करें और समाज में उनके विचार को संप्रेषित करने का कार्य करें।
उपरोक्त बातें स्थानीय देवघर सेंट्रल स्कूल में आयोजित युवा दिवस के उपलक्ष्य में प्राचार्य सुबोध झा ने कहा।

मौके पर देवघर सेंट्रल स्कूल में बच्चों के बीच आयोजित भाषण प्रतियोगिता में नीतीश कुमार ने स्वामीजी को स्वप्नदृष्टा के रूप में परिभाषित किया। पीयूष सिंह ने स्वामीजी के कथन उठो, जागो और अपने लक्ष्य को प्राप्त करो के मूल भावना को परिभाषित किया। शांभवी झा ने स्वामीजी को नमन करते हुए उनके देवघर प्रवास की चर्चा की।

रंग भरो प्रतियोगिता में लक्ष्मी कुमारी को प्रथम, परि राज को द्वितीय तथा आयुष को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। कार्यक्रम को सफल बनाने में कुमारी श्रीजा, दिलीप कुमार पाण्डेय, संजय कुमार झा, जस्टिन मरांडी, आनंद कुमार व अन्य का अहम योगदान रहा।
उपरोक्त बातों की जानकारी विद्यालय के मीडिया प्रभारी दिलीप कुमार पाण्डेय ने दी।

