देवघर कॉलेज़ के संस्थापक प्राचार्य के.एन.सहाय की 112वीं जयंती पर व्याख्यान सम्पन्न
इतिहास को अराजकता से बचाने की जरूरत: डॉ.नीरद
देवघर: ‘झारखण्ड शोध संस्थान’ और ‘के.एन. सहाय फाउंडेशन’ के संयुक्त तत्वावधान में स्थानीय बैद्यनाथधाम स्टेशन रोड में ‘देवघर कॉलेज़’ के संस्थापक प्राचार्य, भाषाविद् एवं जाने-माने इतिहासकार कृष्णनंदन सहाय की 112 वीं जयंती समारोहपूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर “देवघर के इतिहास को स्व.के.एन.सहाय की देन” विषय पर एक व्याख्यान का आयोजन किया गया।

व्याख्यान के मुख्य वक्ता ‘प्रभात ख़बर’, रांची के संपादकीय विभाग के वरिष्ठ पत्रकार डॉ.आर.के.नीरद थे जिनके वक्तव्य के पूर्व आर.मित्रा उच्च विद्यालय के शिक्षक श्रीकांत जायसवाल ने उनके लेखकीय जीवन, संघर्ष एवं उपलब्धियों का परिचय प्रस्तुत किया। इसके बाद संस्थान और फाउंडेशन के द्वारा उन्हें अंग वस्त्र और बुके देकर सम्मानित किया गया। संगीत शिक्षक विश्वनाथ बनर्जी ने उनके सम्मान में हारमोनियम पर कलात्मक अनुशासन से भरा सुमधुर हिंदी और बांग्ला गीत का प्रस्तुत कर समारोह को काव्यगंधी बना दिया।
डॉ.आर.के.नीरद:
अपना व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए डॉ.आर.के.नीरद ने कहा जिस इतिहास की स्थापना आदि प्राचार्य
कृष्णनंदन सहाय करना चाहते थे, वह अभी तक अपना मूर्त्त स्वरूप ग्रहण नहीं कर सका है। संताल परगना की बात हो या समूचे अंग प्रदेश की, इतिहास के क्षेत्र में राज और समाज दोनों विभ्रम की स्थिति में हैं। संताल परगना विश्वविद्यालय के नाम तक में इतिहास से संबंधित बड़ी अकादमिक भूलें दृष्टिबिंब होती हैं। हम संताल विभूतियों के नाम तक को नयी पीढ़ी के सामने कायदे से नहीं रख पाए हैं। झारखण्ड के अनेक जनजातीय विभागों में ‘संताल’ को आज भी ‘संथाल’ लिखा जाता है। यहां की आदिवासी विरासतें भी घनघोर उपेक्षा और बेअदबी की शिकार हैं। सौंदर्यीकरण के नाम ‘संताल हूल’ के एकमात्र भौतिक साक्ष्य मार्टिलो टावर की मौलिकता को मटियामेट कर दिया गया है। चाला शैली की अनुपम विरासत मलूटी मंदिर समूह को जीर्णोद्धार के नाम पर इतना विरूपित किया गया कि माननीय झारखंड उच्च न्यायालय तक को हस्तक्षेप करना पड़ा। काठीकुंड मंदिर के पुरावशेष यूं ही नष्ट हो रहे हैं। साहेबगंज के पुरावशेषों का भी यही हाल है। संताल नायकों के चित्रों और मूर्तियों के निर्माण में भी संस्कृति, परंपरा या इतिहास की परिष्कृत समझ परिलक्षित नहीं होती, बल्कि ‘प्रोजेक्ट’ पूरी करने की हड़बड़ी दिखाई देती है। बिरसा मुंडा से लेकर सिदो-कानृ और तिलका मांझी से लेकर फूलो-झानो तक इतिहास को विकृत करने का एक शर्मनाक सिलसिला बदस्तूर है।
डॉ.उत्तम पीयूष:
मधुपुर के रचनाकार डॉ.उत्तम पीयूष ने व्याख्यान का विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि इतिहास इतिहास होता है। यह न तो आंचलिक होता है, न क्षेत्रीय और न राष्ट्रीय। आदि प्राचार्य कृष्णनंदन सहाय ऐसे ही समग्र इतिहास के पुरोधा थे। देवघर की मूर्तियों पर लिखे उनके दो आलेख आज भी इतिहास के शिलाफलक की तरह हैं जो एक पूरे युग, एक पूरी शैली और एक संपूर्ण विरासत को प्रतिबिंबित करते हैं।
उमेश कुमार:
‘झारखण्ड शोध संस्थान’ के सचिव उमेश कुमार ने कहा कि पुरातत्ववेत्ता डॉ. राजेंद्र लाल मित्रा के शोध को आदि प्राचार्य कृष्णनंदन सहाय ने एक ऊंचा मयार दिया। उन्होंने वीणाधर शिव जैसी मूर्ति की खोज की। साथ ही, उत्तर गुप्त कालीन बुद्ध, पद्मपाणि अवलोकितेश्वर, धनदा तारा और लोकनाथ जैसी बौद्ध प्रतिमाओं की शिनाख्त की। उन्होंने देवघर में एक बौद्ध मठ की संभावना भी जताई जिस पर आगे काम नहीं हो सका। उमेश कुमार ने कहा कि कृष्णनंदन सहाय का शोध वास्तव में पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करते हुए भी प्रगतिशीलता के नूतन क्षितिज उद्घाटित करता है।
डॉ.नंदन दुबे:
ए.एस.कॉलेज के इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ.नंदन किशोर द्विवेदी ने कहा कि आदि प्राचार्य कृष्णनंदन सहाय इतिहासकार होने के साथ एक सजग पत्रकार और स्वतंत्रता सेनानी भी थे और यह भी अपने आप में एक इतिहास है। उन्होंने महात्मा गांधी के दर्शन किए थे और उनके वर्धा आश्रम में भी ठहरे थे। उन्होंने पटना और बांका के साथियों के साथ कांग्रेस की बुलेटिनों का संपादन भी किया था जिनका अंतिम लक्ष्य स्वराज्य था। मधुपुर कॉलेज की पूर्व प्राचार्य डॉ.सुमनलता ने श्रीकृष्ण-राधा के प्रेम,विरह और वेदना की उपमा देते हुए, श्रीकृष्ण-रुक्मिणी के मिलन, श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की संगति, श्रीराम की मर्यादा का सुंदर उल्लेख किया.उन्होंने कृष्णनंदन सहाय के साथ अपने आत्मीय रिश्तों के अनेक आयाम सामने रखे।
आलोक कुमार सिंह:
‘प्रभात ख़बर’ के स्थानीय संपादक आलोक कुमार सिंह ने कृष्णनंदन सहाय को सारस्वत व्यक्तित्व का धनी बताते हुए उन्हें अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। नये संपादक को संस्थान और फाउंडेशन की तरफ से समाजसेवी रूबी झा द्वारी ने बुके देकर सम्मानित किया।
इसके पहले आगत अतिथियों ने स्व. कृष्णनंदन सहाय की तस्वीर पर श्रद्धा सुमन समर्पित किए। समाजसेवी ने दिवंगत विभूति को नैवेद्य अर्पित किए।
समारोह में हिस्सेदारी:
पूर्व गृहमाता सुशीला सिन्हा, सेवानिवृत्त पशु चिकित्सक डॉ.उमेश चंद्र सिन्हा, जाने-माने चार्टर्ड एकाउंटेंट और प्रजापिता ब्रह्माकुमारी के नगर प्रमुख सुनील कुमार सुल्तानिया, आर.मित्रा उच्च विद्यालय के प्रधानाचार्य बिमलेश कुमार पंकज, राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता शिक्षक अरविंद राज जजवाड़े, शिक्षक श्रीकांत जायसवाल, शिक्षक सुभाष कुमार सुमन, शिक्षक एवं कवि रवि शंकर साह, कवि जालेश्वर ठाकुर शौकीन, संगीत शिक्षक विश्वनाथ बनर्जी, भवन निर्माण अभियंता पी.के.राजहंस, समाजसेवी बम शंकर दुबे, गांधीवादी चिंतक विनोद स्वरूप, समाजसेवी त्रिवेणी वर्मा, समाजसेवी रूबी नाज, सेवानिवृत्त समाहरणालय कर्मचारी मनोज प्रसाद बच्चन, संपादक विभाग के नीरज चौधरी, पत्रकार रमाकांत मालवीय, पूर्व छायाकार अंग्रेज दास, वर्तमान छायाकार सुभाष दास, संस्थान के कोषाध्यक्ष प्रवीण कुमार के साथ बड़ी संख्या में आर.मित्रा उच्च विद्यालय के छात्र-छात्रा उपस्थित थे।
समारोह का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन संस्थान के वरिष्ठ सदस्य प्रो.रामनंदन सिंह ने बहुत सुरुचिपूर्ण ढंग से किया।

