देवघर में नवसंवत्सर उत्सव का भव्य आयोजन, शोभा यात्रा से गुंजायमान हुआ शहर
भारत विकास परिषद्, देवघर शाखा के आयोजन में संतों, विद्वानों और नागरिकों की सहभागिता, भारतीय संस्कृति एवं नवचेतना का संदेश
भारत विकास परिषद्, देवघर शाखा द्वारा हिंदू नववर्ष नवसंवत्सर अभिनंदन समारोह अत्यंत श्रद्धा, उल्लास एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में संत-महात्माओं, विद्वानों, समाजसेवियों, मातृशक्ति एवं युवाओं की उल्लेखनीय सहभागिता रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत, भारत माता एवं स्वामी विवेकानंद के चित्र पर पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। “वंदे मातरम्” के सामूहिक गायन से वातावरण राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत हो उठा।
शाखा अध्यक्ष आलोक कुमार मल्लिक ने अपने स्वागत भाषण में कहा – “नवसंवत्सर केवल नववर्ष का आरंभ नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, नवचेतना और नवसंकल्प का प्रतीक है। यह हमें अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाकर समाज एवं राष्ट्र के लिए समर्पित होने की प्रेरणा देता है।”

ध्वजारोहण के पश्चात संपूर्ण कार्यक्रम के संयोजक एवं मार्गदर्शक डॉ. एन. डी. मिश्रा ने बहुत ही आकर्षक अंदाज में भगवा ध्वज के महत्वों को बताया। उन्होंने कहा कि भगवा ध्वज न सिर्फ सनातन संस्कृति का प्रतीक है बल्कि भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का प्रतिबिंब और आदर्श भी है।
विशिष्ट अतिथि रामकृष्ण मिशन विद्यापीठ के प्राचार्य स्वामी दिव्यसुधानंद जी महाराज ने कहा — “भारतीय नववर्ष हमारी सनातन परंपरा की वैज्ञानिकता और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम है। यह हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित कर संतुलित एवं सार्थक जीवन जीने की प्रेरणा देता है।” उन्होंने रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद के संदर्भों का भी भारतीय संस्कृति के उत्थान में योगदानों का उल्लेख किया।

विशिष्ट अतिथि विषय विशेषज्ञ प्रो. के. संबाशिवमूर्ति ने “हिंदू नवसंवत्सर का सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक महत्व” विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा — “नवसंवत्सर भारतीय कालगणना की वैज्ञानिकता का परिचायक है, जो ऋतु परिवर्तन, प्रकृति चक्र और मानव जीवन के संतुलन को दर्शाता है।” प्रो. मूर्ति लक्ष्मी देवी सराफ आदर्श संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य हैं जो हाल में ही तिरुपति से यहां आकर योगदान किया है।
मुख्य अतिथि प्रसिद्ध हनुमान कथावाचक पूज्य श्री प्रदीप कौशिक जी महाराज ने कहा — “जब समाज धर्म, सेवा और संस्कार के मार्ग पर चलता है, तभी राष्ट्र सशक्त बनता है। नवसंवत्सर हमें इसी दिशा में आगे बढ़ने का संदेश देता है।” उन्होंने कहा कि लोग कहते हैं भारत कई वर्षों तक गुलाम रहा, लेकिन सत्यता यह है भारतीय सनातन संस्कृति और धार्मिक आध्यात्मिक लोकाचार में भारत कभी गुलाम नहीं हुआ सिर्फ दिल्ली में शासक बदलते रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विभाग प्रचारक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ श्री बिगेद्र कुमार ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा — “आज आवश्यकता है कि हम अपनी युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, संस्कार और राष्ट्रभावना से जोड़ें। यही सशक्त और संगठित भारत की नींव है।” उन्होंने भारतीय संस्कृति, समाज सेवा और राष्ट्रीय मूल्यों पर प्रेरक संदेश दिया।
कार्यक्रम के दौरान भगवा ध्वजारोहण, भारत माता पूजन एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनों को भावविभोर कर दिया। सभी उपस्थित जनों ने सामूहिक रूप से नवसंवत्सर संकल्प लेते हुए समाज एवं राष्ट्र के उत्थान हेतु कार्य करने का संकल्प दोहराया।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जिसके पश्चात भव्य नवसंवत्सर शोभा यात्रा निकाली गई। शंखनाद के साथ यह शोभा यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं एवं नागरिकों ने भाग लिया। “भारत माता की जय” एवं “वंदे मातरम्” के उद्घोष से पूरा शहर गुंजायमान हो उठा।
शोभा यात्रा के अंत में डॉ. एन. डी. मिश्रा के क्लीनिक के बाहर आमजनों के बीच लड्डु वितरण के साथ कार्यक्रम का सफल समापन हुआ। कार्यक्रम का संचालन श्री रामसेवक सिंह ‘गुंजन’ द्वारा प्रभावी ढंग से किया गया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में परिषद के सचिव कंचन शेखर, कोषाध्यक्ष एस. पी. भुईयां बिलास, रंजीत बरनवाल, बिपिन मिश्रा, प्रिंस सिंघल, प्रशांत कुमार सिन्हा, कंचन मूर्ति साह, जयप्रकाश गुप्ता सहित परिषद के कई सदस्यों का उल्लेखनीय सहयोग रहा। कार्यक्रम में 150 से भी ज्यादा प्रबुद्धजनों, पंडा धर्मरक्षिणी के उपाध्यक्ष संजय मिश्रा, पेंशनर समाज के सचिव जयप्रकाश सिंह एवं पदाधिकारीगण, सहदेव पोद्दार, दिलीप वर्मा आदि की गरमाई उपस्थिति तथा लक्ष्मी देवी सराफ आदर्श संस्कृत महाविद्यालय के वैदिक संस्कृत के छात्रों की भारतीय परिधान में उपस्थिति आकर्षक रही।

