कोडरमा (शहर परिक्रमा)

डीएवी कोडरमा में धूमधाम से मनाया गया डॉ भीमराव अंबेडकर जयंती एवं बैसाखी का पावन पर्व

कोडरमा: पी वी एस एस डीएवी पब्लिक स्कूल झुमरी तिलैया में भारत के संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती एवं बैसाखी के पवित्र त्यौहार  को बच्चों ने धूमधाम से मनाया ।
    इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य कृष्ण कुमार सिंह एवं सभी शिक्षक -शिक्षिकाओं ने डॉ भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित किया।

9वीं कक्षा की शांभवी वर्मा ने  अंग्रेजी में एवं दृष्णा कश्यप ने हिंदी में अपना वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए संविधान निर्माता बाबासाहेब की उपलब्धियों एवं देश में दिए गए  उनके योगदानों पर प्रकाश डाला। नवीं कक्षा की साक्षी राज ने प्रश्नोत्तरी के द्वारा बच्चों से नवीनतम जानकारियां साझा की। छठी कक्षा की अदिती, नंदिका, आराध्या राणा, सृष्टि कुमारी, स्वीटी कुमारी, अर्पित राज ने सुंदर व आकर्षक पोस्टर बनाकर बाबा साहेब की जयंती को यादगार बनाया। मंच संचालन  9वीं  कक्षा की वर्षा प्रिया ने किया।
     बैसाखी के पावन अवसर पर विद्यालय में नन्हें – मुन्ने बच्चों ने भारत की विविध संस्कृति को दर्शाते हुए सुंदर व मनमोहक पोस्टर बनाए। राजविका पांडे ने सुंदर कविता एवं सौम्या राज ने रोचक तथ्य प्रस्तुत किया । आराध्या मिश्रा ने हिंदी में बैसाखी के महत्व पर प्रकाश डाला। सातवीं कक्षा की प्रकृति घोष ने एकल नृत्य से सभी लोगों को मंत्र मुक्त कर दिया। मंच संचालन आठवीं कक्षा की शाम्भवी सिंह ने किया ।
     बच्चों द्वारा प्रस्तुत  कार्यक्रमों की सराहना करते हुए विद्यालय के प्राचार्य ने अपने संबोधन में डॉ. भीमराव अंबेडकर के जीवन, संघर्ष एवं उनके महान विचारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को उनके आदर्शों पर चलने और शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित किया। बाबा साहेब की प्रारंभिक शिक्षा अभावों में बीती परंतु उन्होंने विदेश जाकर कोलंबिया विश्वविद्यालय तथा लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से उच्च शिक्षा प्राप्त की । उन्होंने अर्थशास्त्र, राजनीति और कानून में गहन ज्ञान अर्जित किया । डॉ भीमराव अंबेडकर न केवल भारत के संविधान निर्माता थे ,बल्कि वे एक  समाज सुधारक और शिक्षाविद भी थे। उनके नेतृत्व में तैयार किया गया संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार और स्वतंत्रता प्रदान करता है। उन्होंने सामाजिक न्याय और समानता को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण नीतियां बनाईं जो आज भी समाज के लिए महत्वपूर्ण हैं। उनका जीवन संघर्ष, शिक्षा और समर्पण का अद्भुत उदाहरण है। बाबा साहब ने दलितों और समाज के पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। उनके विचार आज भी समाज के लिए प्रेरणा स्रोत है । उनके आदर्शों को अपनाकर  ही एक समता मूलक समाज का निर्माण संभव है।
     प्राचार्य ने बैसाखी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह  पर्व किसानों के लिए नई फसल (रबी) के पकने की खुशी का प्रतीक है। इस दिन किसान अपनी मेहनत के सफल होने पर ईश्वर का धन्यवाद करते हैं और खुशियां मनाते हैं। बैसाखी केवल एक फसल पर्व नहीं है , बल्कि धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है । इसी दिन  गुरु गोविंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। यह त्यौहार लोगों में एकता, भाईचारे और खुशी का संदेश देता है। यह पर्व हम सभी को आपस में मिलजुल कर रहने और खुशियां साझा करने की प्रेरणा देता है, तथा लोगों के परिश्रम और आस्था  के महत्व को दर्शाता है। इस तरह के कार्यक्रमों के आयोजन से बच्चों में आत्मविश्वास , रचनात्मकता, उत्साह, सांस्कृतिक व धार्मिक जागरूकता का विकास होता है।
     इन कार्यक्रमों में बच्चों का मार्गदर्शन प्रमोद बल्लारी खड़ंगा, उज्जल घोष,अंजली कुमारी एवं चांदनी दूबे ने किया ।

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