रवीन्द्रनाथ टैगोर जयंती पर डीएवी पब्लिक स्कूल में ‘गुरुदेव’ को श्रद्धापूर्वक किया गया नमन
कोडरमा: पीवीएसएस डीएवी पब्लिक स्कूल, झुमरीतिलैया में आज विश्वकवि रवीन्द्रनाथ टैगोर की जयंती अत्यंत हर्षोल्लास एवं श्रद्धा के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्राचार्य तथा शिक्षक-शिक्षिकाओं द्वारा गुरुदेव के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देने के साथ हुआ।

श्रद्धांजलि अर्पण के पश्चात विद्यार्थियों ने अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से गुरुदेव के प्रति सम्मान व्यक्त किया। छात्रा पल्लवी कुमारी ने अपने ओजस्वी भाषण में रवीन्द्रनाथ टैगोर के जीवन-दर्शन तथा साहित्यिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। वहीं वैभवी श्री ने एकल गीत प्रस्तुत कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। अर्जित विश्वास एवं देवाग्रह मंडल ने अपने मधुर सामूहिक गीत से कार्यक्रम में भावपूर्ण वातावरण निर्मित किया, जिसे उपस्थित सभी लोगों ने खूब सराहा।
प्रकृति घोष एवं ज्योत्सना ने संयुक्त रूप से मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर रवीन्द्र संगीत की जीवंतता को मंच पर साकार कर दिया। विद्यालय की शिक्षिका चाँदनी दुबे ने रवीन्द्रनाथ टैगोर की जीवनी एवं उनकी शिक्षण-पद्धति पर एक प्रभावशाली कार्यशाला प्रस्तुत की, जिससे विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के ज्ञान में अभिवृद्धि हुई।
पूरे कार्यक्रम का सफल एवं गरिमामयी मंच संचालन विद्यालय के शिक्षक श्री उज्ज्वल घोष द्वारा किया गया। उनकी प्रभावशाली शैली ने कार्यक्रम को निरंतर रोचक बनाए रखा।
इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य कृष्ण कुमार सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर केवल महान कवि ही नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी शिक्षाविद् भी थे। उन्होंने ‘गीतांजलि’ नामक काव्य-संग्रह की रचना की, जिसके लिए उन्हें वर्ष 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ। वे नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले प्रथम एशियाई बने, जिससे सम्पूर्ण भारत गौरवान्वित हुआ। उन्होंने शिक्षा को प्रकृति के सान्निध्य से जोड़ने की प्रेरणा दी। आज के डिजिटल युग में भी उनके विचार एवं गीतांजलि के संदेश मानवता, शांति और सृजनात्मकता का मार्ग प्रशस्त करते हैं। विद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों में उसी संवेदनशीलता और रचनात्मक सोच का विकास करना है, जिसका स्वप्न गुरुदेव ने देखा था।
इस आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय की शिक्षिकाओं एवं शिक्षकों — मौसुमी मल्लिक, उज्ज्वल घोष, सत्य प्रकाश तिवारी, चाँदनी दुबे एवं संगीता जेठवा — का विशेष योगदान रहा। उनकी देखरेख में सभी गतिविधियाँ अनुशासित एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुईं।

